गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले में वाहन चेकिंग के दौरान करीब 1 करोड़ रुपये की नकदी मिलने के बाद कथित सौदेबाजी का मामला सामने आया है। आरोप है कि धरनावदा थाना क्षेत्र की रूठियाई चौकी पर पुलिस ने गुजरात के एक जीरा कारोबारी की स्कॉर्पियो से मिली रकम में से 20 लाख रुपये लेकर उसे छोड़ दिया था। मामला तब और गंभीर हो गया जब एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के फोन के बाद कथित तौर पर लिए गए 20 लाख रुपये भी वापस कर दिए गए। घटना 19 मार्च की बताई जा रही है जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के मुताबिक, नेशनल हाईवे-46 पर रूठियाई चौकी के पास पुलिस टीम वाहन चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान गुजरात नंबर (GJ 05 RK 9351) की स्कॉर्पियो को रोका गया था। तलाशी में गाड़ी से नोटों के बंडल मिले थे। जिनकी कुल रकम करीब 1 करोड़ रुपये बताई गई थी। नियमों के तहत इतनी बड़ी नकदी मिलने पर आयकर विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देना जरूरी होता है लेकिन आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई के बजाय सेटलमेंट का रास्ता चुना।

पुलिस और कारोबारी के बीच 20 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। पुलिस ने कथित रूप से यह रकम अपने पास रख ली और शेष 80 लाख रुपये के साथ वाहन को जाने दिया था। इस पूरे घटनाक्रम की कोई आधिकारिक एंट्री या सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी गई जिससे मामला और संदिग्ध हो गया।

मामले ने नाटकीय मोड़ तब लिया जब यह जानकारी सामने आई कि गुजरात कैडर के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी का फोन आने के बाद पुलिस ने लिए गए 20 लाख रुपये भी वापस कर दिए। हालांकि, इस दावे की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन सोशल मीडिया पर चर्चा के बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया है।

घटना की जानकारी मिलते ही ग्वालियर रेंज के डीआईजी अमित सांघी 21 मार्च की देर रात खुद गुना पहुंचे। उन्होंने धरनावदा थाने और रूठियाई चौकी का निरीक्षण किया, रिकॉर्ड खंगाले और ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों से लंबी पूछताछ की। साथ ही टोल नाके का भी निरीक्षण कर पूरी स्थिति को समझने की कोशिश की।

प्रारंभिक जांच में लापरवाही और संदिग्ध आचरण सामने आने के बाद थाना प्रभारी प्रभात कटारे समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें एएसआई साजिद हुसैन, प्रधान आरक्षक देवेंद्र सिंह सिकरवार और आरक्षक सुंदर रमन शामिल हैं। गुना एसपी अंकित सोनी ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि नियमों का पालन नहीं किया गया इसलिए सस्पेंशन किया गया है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी नकदी मिलने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं की गई और किसके निर्देश पर वाहन को छोड़ा गया। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि जांच के आधार पर आगे और कड़ी कार्रवाई संभव है।

गौरतलब है कि इससे पहले अक्टूबर 2025 में सिवनी जिले में भी इसी तरह का मामला सामने आया था। उस दौरान करीब 3 करोड़ रुपये की बरामदगी में से रिकॉर्ड में केवल 1.45 करोड़ रुपये ही दिखाए गए थे। उस मामले में भी कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई थी।