भागलपुर। बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बने 4.7 किलोमीटर लंबे विक्रमशिला सेतु का करीब 34 मीटर हिस्सा रविवार देर रात अचानक ध्वस्त होकर नदी में गिर गया। राहत की बात यह रही कि प्रशासन ने पहले ही पुल पर यातायात रोक दिया था जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। घटना के बाद सीमांचल समेत लगभग 16 जिलों का संपर्क प्रभावित हो गया है। जिसकी वजह से रोजाना आने-जाने वाले करीब एक लाख लोगों की आवाजाही बाधित हो गई।

जानकारी के मुताबिक, रविवार शाम पुल पर एक्सपेंशन जॉइंट के पास गैप बढ़ने की सूचना मिली थी। बताया जा रहा है कि पहले करीब 10 इंच का हिस्सा धंसा और देर रात एक पूरा स्लैब गंगा में समा गया। उस समय पुल पर वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी लेकिन पुलिस ने समय रहते दोनों ओर से ट्रैफिक रोक दिया। ट्रैफिक डीएसपी संजय कुमार के अनुसार, स्ट्रीट लाइट पोल संख्या 133 के पास गैप बढ़ने की सूचना मिलते ही तत्काल वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई थी।

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घटना के बाद पुल के दोनों छोर पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और वाहनों को मुंगेर पुल की ओर डायवर्ट किया जा रहा है। सिटी डीएसपी 1 अजय चौधरी ने बताया कि नवगछिया और भागलपुर दोनों तरफ पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि कोई दुर्घटना न हो। नेशनल हाईवे के एसडीओ सुधीर कुमार के मुताबिक, क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक करने में कम से कम 15 दिन का समय लगेगा।

जिला अधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि रात 12:35 बजे के आसपास स्लैब धंसने की प्रक्रिया शुरू हुई थी लेकिन उससे पहले ही पुल खाली करा लिया गया था। उन्होंने कहा कि जल्द ही एक उच्च स्तरीय समिति मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करेगी। इससे पहले भी जांच टीम पुल की स्थिति का निरीक्षण कर चुकी थी।

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इस मामले में लापरवाही को लेकर पथ निर्माण विभाग ने एक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को निलंबित कर दिया है। बिहार राज्य पुल निगम लिमिटेड के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर ने कहा कि पुलिस और जिला प्रशासन की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। उन्होंने बताया कि मेंटेनेंस के लिए DPR पहले ही भेजी जा चुकी थी और अब पुल की मरम्मत में सेना की मदद लेने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में रक्षा मंत्री से भी बात की है।

विक्रमशिला सेतु का निर्माण यूपी ब्रिज कॉर्पोरेशन द्वारा कराया गया था और यह भागलपुर को सीमांचल के कई जिलों से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। प्रतिदिन लगभग 50 हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन इस पुल से गुजरते हैं। हालांकि, पिछले एक दशक में इस पुल की तीन बार मरम्मत हो चुकी है और मार्च 2026 में भी यहां रिपेयर वर्क किया गया था। स्थानीय स्तर पर पुल की स्थिति को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। साल 2020 में भी इसकी मरम्मत की गई थी। हाल ही में पुल की वॉल वायरिंग के क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आई थी लेकिन प्रशासन ने उस समय किसी खतरे से इनकार किया था।

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करीब एक महीने पहले ही पुल के पिलर नंबर 17, 18 और 19 की प्रोटेक्शन वॉल तेज बहाव के कारण क्षतिग्रस्त हो गई थी। इंजीनियरों ने तब चेतावनी दी थी कि गंगा के तेज प्रवाह, बड़े जहाजों और भारी नावों की आवाजाही से पिलरों पर दबाव बढ़ रहा है। साथ ही उनका यह भी कहना था कि यह बाढ़ के समय और खतरनाक हो सकता है।