पश्चिम बंगाल। ममता बनर्जी के इस्तीफा देने से इनकार करने के बाद पश्चिम बंगाल में बड़ा संवैधानिक घटनाक्रम सामने आया है। राज्यपाल आर. ऐन. रवि ने संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए 7 मई से पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग करने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस सरकार का कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त हो गया और ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद पर नहीं रही। 

राज्यपाल द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया कि विधानसभा को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाता है। दरअसल राज्य सरकार का पांच साल का कार्यकाल खत्म हो चुका था लेकिन चुनाव में हार के बावजूद ममता बनर्जी पद छोड़ने को तैयार नहीं थी। उन्होंने भाजपा की जीत पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव में वोटों की लूट हुई और ईवीएम में गड़बड़ी की गई है।

तृणमूल कांग्रेस का दावा था कि लगभग 100 सीटों पर उसके उम्मीदवार मतगणना के शुरुआती दौर में आगे चल रहे थे लेकिन बाद में नतीजे बदल गए। पार्टी ने चुनाव आयोग पर भी भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया था। ममता बनर्जी लगातार कहती रहीं कि भाजपा ने अनैतिक तरीके से सत्ता हासिल की है।

पूर्व केंद्रीय सचिव जवाहर सरकार ने कहा कि सरकार का कार्यकाल समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री का पद पर बने रहना संवैधानिक रूप से संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में नई सरकार के गठन और नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने तक राज्यपाल अंतरिम रूप से प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालते हैं।

चुनाव परिणाम आने के बाद से पश्चिम बंगाल में लगातार तनाव और हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती की गई थी। बावजूद इसके कई इलाकों से झड़प की खबरें सामने आ चुकी हैं। 

अब तक पांच से ज्यादा लोगों की मौत की खबर सामने आई हैं। इनमें भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ भी शामिल हैं। उनकी मध्यग्राम में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। भाजपा ने अभी तक मुख्यमंत्री पद के लिए अपने चेहरे की घोषणा नहीं की है। पार्टी विधायक दल की बैठक गुरुवार दोपहर 2 बजे बुलाई गई है। जिसमें नए नेता का चयन किया जाएगा।