ग्वालियर। मध्यप्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर 21.05 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्क तक पहुंचने के लिए पुलिस अब उन बैंक खातों की जांच कर रही है जिनमें सबसे अधिक रकम ट्रांसफर हुई थी। राज्य साइबर सेल अब तक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की मदद से 2.05 करोड़ रुपये फ्रीज कराने में सफल रही है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच राज्य साइबर सेल की भोपाल और ग्वालियर इकाइयां संयुक्त रूप से कर रही हैं। वरिष्ठ अधिकारी भोपाल से रोजाना जांच की निगरानी कर रहे हैं। लगातार मॉनिटरिंग और त्वरित कार्रवाई के कारण फ्रीज की गई राशि बढ़कर 2.05 करोड़ रुपये पहुंच गई है। इससे पहले रविवार तक 1.92 करोड़ रुपये ही फ्रीज हो सके थे।
जांच में सामने आया है कि ठगी की बड़ी रकम देश के अलग-अलग राज्यों में मौजूद कंपनियों के करंट खातों में भेजी गई। पुलिस के अनुसार, रांची के एक बैंक खाते में 43 लाख रुपये, बेंगलुरु में 50 लाख रुपये, चेन्नई और कर्नाटक के गुलबर्गा स्थित खातों में 25-25 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा इंदौर के एक खाते में 10 लाख रुपये पहुंचे। पटना, ठाणे, कोयंबटूर, दिल्ली, रायपुर और लुधियाना के करंट खातों का भी इस पूरे नेटवर्क में इस्तेमाल होने की जानकारी मिली है। अब जांच एजेंसियां इन खातों के संचालकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि पीड़ित से संपर्क करने वाली महिला ने खुद को दिव्या सिंह बताया था। उसने सामान्य मोबाइल कॉल नहीं बल्कि इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल किया था। शुरुआती जांच के अनुसार, कॉल को सर्वर जंप तकनीक के जरिए किया गया था जिससे उसकी वास्तविक लोकेशन छिपी रही। इसी वजह से पुलिस को कॉल करने वाले व्यक्ति की सटीक लोकेशन ट्रेस करने में कठिनाई हो रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल जानबूझकर किया गया ताकि जांच को भ्रमित किया जा सके और आरोपियों तक पहुंचना मुश्किल हो।