उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में पुलिस ने MDMA ड्रग सिंडिकेट का खुलासा किया है। पुलिस ने आगर रोड स्थित एक गैरेज पर छापा मारा। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में संदिग्ध केमिकल, नकदी और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और एक अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क के सक्रिय होने के संकेत मिले हैं।
मामला 3 अप्रैल का बताया जा रहा है। चिमनगंज मंडी थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कृष्णा मोटर्स नाम के गैरेज में अवैध केमिकल्स जमा किए गए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर छापा मारा और मुख्य आरोपी अर्पित उर्फ सौरभ गुप्ता को मौके से पकड़ लिया। आगे की जांच में मंदसौर निवासी रंजीत और आगर मालवा निवासी ओमप्रकाश को भी गिरफ्तार किया गया है।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी फर्जी बिलिंग के जरिए गुजरात की केमिकल कंपनियों से प्रतिबंधित पदार्थ मंगवा रहे थे। इनमें ब्रोनोपोल और 2 ब्रोमो 4 मिथाइल प्रोपियोफेनोन जैसे केमिकल शामिल हैं। इनका इस्तेमाल सिंथेटिक ड्रग्स बनाने में किया जाता है। पुलिस के अनुसार, इन केमिकल्स को पेंट और पुताई के काम के नाम पर मंगवाया गया था।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 75 किलोग्राम ब्रोनोपोल क्रिस्टल पाउडर भी जब्त किया है। जिसकी अनुमानित कीमत करीब 48 हजार रुपए बताई गई है। इसके अलावा 8.50 लाख रुपए नकद, तीन फर्जी बिल और एक बलेनो कार भी बरामद की गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क के तार राजस्थान के झालावाड़ से जुड़े हैं। चिमनगंज थाना प्रभारी गजेंद्र पचौरिया के मुताबिक, मुख्य आरोपी सौरभ गुप्ता गैरेज में काम करता था। उसे यह केमिकल रंग बनाने में उपयोगी बताकर रखने को कहा गया था। बाद में कुछ लोगों के संपर्क में आकर उसने यह सामग्री मंगवाई। उसने दो चरणों में केमिकल मंगवाया था। पहली बार उसने करीब 50 किलो ब्रोनोपोल शामिल था।
पुलिस का मानना है कि सौरभ इस अवैध गतिविधि में नया था और धीरे-धीरे नेटवर्क का हिस्सा बन रहा था। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी सप्लायर की भूमिका में काम कर रहे थे और फ्रीगंज व आगर रोड पर इनके दो गैरेज संचालित हो रहे थे।
एक अहम तथ्य यह भी सामने आया है कि जिन केमिकल्स का उपयोग किया जा रहा था वे शुरुआत में प्रतिबंधित नहीं थे। आरोपियों ने इन्हें जनवरी में मंगवाया था। जबकि, इन पर 11 मार्च 2026 को प्रतिबंध लगाया गया था। आमतौर पर ऐसे केमिकल्स के लिए उपयोग से संबंधित प्रमाणपत्र देना जरूरी होता है। इसके बावजूद आरोपियों ने गलत जानकारी देकर इन्हें हासिल किया था।
यह कार्रवाई चिमनगंज मंडी थाना, साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने की। पुलिस का कहना है कि समय रहते इस नेटवर्क को पकड़ लिया गया। जिससे शहर में बड़े स्तर पर नशे के कारोबार को फैलने से रोका जा सका। फिलहाल पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है और पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है।