नई दिल्ली। ई रिक्शा चालकों के लिए परेशानी का कारण बने तीन मोबाइल ऐप्स के खिलाफ केंद्र सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। आईटी मंत्रालय ने BAT-BMS, लॉसिजी (Losigy) और इपोच ली आयन (EPOCH Li-ion) ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश दिए हैं। इन ऐप्स के जरिए कुछ लोग ब्लूटूथ के माध्यम से ई रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से कनेक्ट होकर चलते वाहन की बैटरी बंद कर रहे थे। जिससे सड़क पर अचानक ई रिक्शा रुकने की घटनाएं सामने आ रही थी। हालांकि, मंत्रालय के आदेश के बावजूद ये ऐप्स फिलहाल प्ले स्टोर पर उपलब्ध हैं।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए थे जिनमें कुछ लोग मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर चलते हुए ई रिक्शा को अचानक बंद करते दिखाई दिए। शिकायतों के बाद मामले की जांच हुई तो पता चला कि कई लीथियम आयन बैटरियों के ब्लूटूथ आधारित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में पर्याप्त सुरक्षा नहीं थी। कमजोर या बिना पासवर्ड वाले बीएमएस से कोई भी व्यक्ति सीमित दूरी के भीतर मोबाइल ऐप के जरिए कनेक्ट होकर बैटरी को नियंत्रित कर सकता था।
यह भी पढ़ें:उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह, दो अक्टूबर से शुरू होगी यात्रा
विशेषज्ञों के अनुसार, BAT-BMS जैसे ऐप मूल रूप से बैटरी की निगरानी और रखरखाव के लिए विकसित किए गए थे। इनका उद्देश्य बैटरी की चार्जिंग, वोल्टेज, तापमान, स्वास्थ्य और अन्य तकनीकी जानकारियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग करना है। जरूरत पड़ने पर अधिकृत उपयोगकर्ता बैटरी की कुछ सेटिंग्स भी बदल सकते हैं। यह कनेक्शन सामान्यतः 10 से 15 मीटर की दूरी तक ब्लूटूथ के जरिए स्थापित हो जाता है। इसी सुविधा का गलत इस्तेमाल कर कुछ लोग ई रिक्शा की बैटरी को रिमोट तरीके से डिस्चार्ज मोड में डालकर वाहन रोक रहे थे।
हालांकि, यह खतरा सभी इलेक्ट्रिक वाहनों पर लागू नहीं होता। केवल वे ई रिक्शा या अन्य इलेक्ट्रिक वाहन प्रभावित हो सकते हैं जिनमें ब्लूटूथ सपोर्ट वाली लीथियम आयन बैटरी लगी हो और उसके बीएमएस में मजबूत पासवर्ड या सुरक्षा व्यवस्था न हो। दूसरी ओर पारंपरिक लेड एसिड बैटरी वाले ई रिक्शा इस समस्या से पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसी तरह जिन लीथियम बैटरियों में निर्माता या डीलर ने सुरक्षित पासवर्ड और एन्क्रिप्शन लागू किया है उन्हें बाहरी व्यक्ति ऐप के जरिए एक्सेस नहीं कर सकता।
यह भी पढ़ें:उज्जैन में मूसलाधार बारिश से उफान पर शिप्रा, उफनती नदी में बहा पंचायत सचिव
जानकारी के मुताबिक, BAT-BMS और अन्य संबंधित ऐप्स का विकास मूल रूप से सौर ऊर्जा प्रणालियों, नावों और अन्य उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली लीथियम बैटरियों की निगरानी के लिए किया गया था। इनमें मौजूद डिस्चार्ज ऑन/ऑफ जैसी सुविधाएं बैटरी की सुरक्षा और रखरखाव के उद्देश्य से जोड़ी गई थी। लेकिन भारत में कुछ ई रिक्शा बैटरियों में कमजोर सुरक्षा व्यवस्था होने के कारण इन ऐप्स का दुरुपयोग शुरू हो गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुरक्षा चूक के लिए मुख्य रूप से वे स्थानीय बैटरी निर्माता, असेंबलर और डीलर जिम्मेदार हैं। उन्होंने कम लागत वाली लीथियम बैटरियों के बीएमएस को बिना पासवर्ड या डिफॉल्ट सुरक्षा के साथ बाजार में उपलब्ध कराया। ऐसी स्थिति में कोई भी व्यक्ति आसानी से ब्लूटूथ के जरिए बैटरी से जुड़ सकता है।
सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस समस्या का सबसे प्रभावी समाधान मजबूत पासवर्ड और सुरक्षित बीएमएस कॉन्फ़िगरेशन बताया है। निर्माताओं और डीलरों को प्रत्येक बैटरी में यूनिक पासवर्ड और सुरक्षित सेटिंग्स लागू करनी चाहिए। वहीं, जिन ई रिक्शा चालकों के पास पहले से ऐसी बैटरियां हैं उन्हें अपने डीलर या अधिकृत मैकेनिक से संपर्क कर ब्लूटूथ बीएमएस पर पासवर्ड लॉक सक्रिय कराना चाहिए। यदि बैटरी में 1234 या 0000 जैसे डिफॉल्ट पासवर्ड सेट हैं तो उन्हें तुरंत बदल देना चाहिए।
यह भी पढ़ें:भोपाल में फायर सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर बड़ी कार्रवाई, अनअकेडमी और दुर्रानी कोचिंग सेंटर सील
विशेषज्ञों ने ई रिक्शा चालकों को यह सलाह भी दी है कि यदि चलते समय वाहन अचानक बंद हो जाए तो घबराने के बजाय पहले सुरक्षित स्थान पर वाहन रोकें, इंडिकेटर चालू करें और बैटरी के मुख्य स्विच (MCB) को बंद कर दोबारा चालू करें। साथ ही समय-समय पर यह भी जांचते रहें कि उनकी बैटरी का ब्लूटूथ सिस्टम सुरक्षित और पासवर्ड से संरक्षित है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।