भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। विगत दिनों दिल्ली में की गई एक प्रेस वार्ता अब उनके लिए कानूनी मुसीबत बन गई है। वीर भारत न्यास के सचिव और सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी की ओर से उनके वकीलों ने जीतू पटवारी को 5 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस थमा दिया है।
वीर भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी की ओर से भेजे गए इस नोटिस में कहा गया है कि जिस तरह सार्वजनिक मंच से पीसीसी चीफ पटवारी ने श्रीराम तिवारी पर आरोप लगाए हैं, उसी तरह सार्वजनिक रूप से माफी मांगें, अन्यथा मानहानि की कार्रवाई के लिए तैयार रहें। श्रीराम तिवारी की ओर से पटवारी के न्यास की प्रासंगिकता को लेकर दिए गए बयान के बाद पांच सवाल भी किए गए हैं।
वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी के वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश मेहता और अधिवक्ता गुंजन चौकसे ने कहा कि यह न्यास पूरी तरह से एक सरकारी न्यास है। जीतू पटवारी द्वारा दिल्ली में की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोप तथ्यों से परे हैं। वकीलों ने स्पष्ट किया कि उज्जैन में ‘वीर भारत संग्रहालय’ बनाने के लिए सरकार ने यह जमीन संस्कृति विभाग को आवंटित की है। यह जमीन किसी निजी व्यक्ति या संस्था के नाम पर अलॉट नहीं की गई है, बल्कि पूरी तरह से संस्कृति विभाग के अधीन ही है और इसे कैबिनेट द्वारा बकायदा स्वीकृति दी गई है।
अधिवक्ता गुंजन चौकसे ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जीतू पटवारी जनता के बीच एक झूठा नरेटिव सेट करने की कोशिश कर रहे हैं। बिना किसी पुख्ता जानकारी को जुटाए और बिना तथ्यों की जांच किए इतने बड़े स्तर पर आरोप लगाना सीधे तौर पर गलत और गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने आगे बताया कि इस न्यास का गठन साल 2013 में हुआ था. नियम के मुताबिक, प्रदेश के मुख्यमंत्री ही पदेन रूप से इसके अध्यक्ष होते हैं।
वकीलों की तरफ से बताया गया है कि जीतू पटवारी को 5 करोड़ रुपए का मानहानि का नोटिस भेजा गया है। अगर वह अपने आरोपों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। बता दें कि जीतू पटवारी ने विगत दिनों राज्य सरकार पर वीर भारत न्यास को 500 करोड़ रुपए की जमीन महज 1 रुपये में सौंपने के गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने बाद में स्पष्ट किया था कि जीतू पटवारी को ट्रस्ट के संबंध में पूरी जानकारी नहीं होने के कारण उन्होंने ये आरोप लगाए थे। जबकि यह न्यास पूरी तरह शासकीय है और इस मामले में सीएम के विरुद्ध कोई "चार्ज स्टैंड" नहीं करता।