छतरपुर। मध्य प्रदेश में रेलवे परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। छतरपुर जिले में रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए पहले ही करीब 55 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं, लेकिन अब रेलवे ने प्रस्तावित रूट बदल दिया है। नए रूट पर करीब 50 हजार और पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है।

दरअसल, ललितपुर-सिंगरौली परियोजना के तहत खजुराहो से पन्ना को जोड़ने वाली यह रेल लाइन पहाड़ियों और अजयगढ़ घाटी के बीच से गुजरनी है। रेलवे ने 2021 में रूट डिजाइन फाइनल किया था। फिर 315 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई और 2022-23 में जंगल में लगे 54,578 पेड़ काटे गए थे।

लेकिन अब रेलवे ने पुराना डिजाइन बदल दिया है। 54 हजार से अधिक पेड़ों को काटने के बाद रेलवे का कहना है कि पुराने डिजाइन में 6 बड़े मोड़ थे, जहां ट्रेन संचालन असुरक्षित था। नए रूट के लिए 258 हेक्टेयर जंगल के दोबारा अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वन विभाग ने नए इलाके में पेड़ों की गिनती शुरू कर दी है। अनुमान है कि 50 हजार और पेड़ अफसरों की लापरवाही के कारण काटे जाएंगे।

नई रेल लाइन के लिए सिर्फ पचास हजार पेड़ ही नहीं बल्कि पहाड़ काटे जाएंगे। इसका मलबा रेलवे जंगल में डंप करना चाहता है, पर पन्ना टाइगर रिजर्व ने इसका विरोध किया है। टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वीके पटेल ने रेलवे को पत्र लिखकर कहा है कि मलबा जंगल के बाहर डंप किया जाए। 

बहरहाल, अब सवाल ये है कि जब साल 2021 में डिजाइन फाइनल हुआ था तब रेलवे को पता कैसे नहीं चला कि यहां ट्रेन संचालन असुरक्षित है? 54 हजार से ज्यादा वृक्षों की बलि के बाद अफसर जागे हैं। अगर पुराना रूट इतना जोखिमभरा था तो हजारों पेड़ क्यों काटे गए? इसमें राज्य सरकार की लापरवाही है या रेलवे की? क्योंकि नए रूट बनने की वजह से पर्यावरण और सरकारी खजाने दोनों को बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ेगा।