नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 18 अप्रैल को दिए गए ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। देश भर के 700 से अधिक नागरिकों ने चुनाव आयोग (ECI) से शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि इस संबोधन के जरिए आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया गया है।

शिकायतकर्ताओं में पूर्व नौकरशाह, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री का यह संबोधन राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण था और इसमें विपक्षी दलों पर निशाना साधा गया। शिकायत में कहा गया है कि यह संबोधन दूरदर्शन, ऑल इंडिया रेडियो और संसद टीवी जैसे सरकारी माध्यमों पर प्रसारित किया गया, जिनका खर्च जनता के पैसे से चलता है। ऐसे में इसे चुनावी प्रचार के लिए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के रूप में देखा जा रहा है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इससे सत्तारूढ़ दल को अनुचित लाभ मिला और चुनावी मैदान में बराबरी के सिद्धांत को नुकसान पहुंचा। शिकायत में चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि सत्ता में बैठी पार्टी सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल चुनावी प्रचार के लिए नहीं कर सकती। शिकायत में कहा गया है कि चुनाव आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है, इसलिए इस मामले में जल्द और निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है।

शिकायतकर्ताओं ने आयोग से इस मामले की जांच करने, संबोधन की विषयवस्तु और प्रसारण के तौर-तरीकों की समीक्षा करने तथा उचित कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि इस संबोधन के प्रसारण के लिए पूर्व अनुमति दी गई थी, तो अन्य राजनीतिक दलों को भी सार्वजनिक प्रसारकों पर समान समय दिया जाना चाहिए, ताकि चुनावी प्रक्रिया में समान अवसर सुनिश्चित हो सके।

इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, राजनीतिक अर्थशास्त्री पी. प्रभाकर, कार्यकर्ता योगेन्द्र यादव, अर्थशास्त्री जयति घोष, संगीतकार-लेखक टी एम कृष्णा, पूर्व केंद्रीय सचिव ई ए एस शर्मा, कार्यकर्ता हर्ष मंदर, पत्रकार पी. गुहा ठाकुरता, शिक्षाविद जोया हसन और पूर्व राजदूत मधु भादुड़ी भी शामिल हैं।