श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का PSLV-C62 मिशन मंगलवार को असफल हो गया। सुबह 10:18 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफल प्रक्षेपण के कुछ ही मिनट बाद रॉकेट को गंभीर तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ा। उड़ान के लगभग आठ मिनट बाद तीसरे चरण (PS3) में परफॉर्मेंस डिस्टर्बेंस सामने आया जिसके कारण रॉकेट अपने निर्धारित उड़ान पथ से भटक गया और उपग्रहों को कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका।
मिशन की विफलता की पुष्टि करते हुए ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने बताया कि शुरुआती चरण पूरी तरह सामान्य रहे लेकिन तीसरे चरण में चैंबर प्रेशर में अचानक गिरावट दर्ज की गई। इसी वजह से इंजन आवश्यक थ्रस्ट नहीं दे सका। नारायणन के अनुसार, उड़ान डेटा में स्पष्ट रूप से पथ विचलन देखा गया है और इस स्थिति में पेलोड को कक्षा में पहुंचाना संभव नहीं रहा।
PSLV-C62 पर DRDO का स्ट्रेटजिक सैटेलाइट अन्वेषा मुख्य पेलोड के रूप में लगा था। इसके साथ 15 अन्य उपग्रह भी थे। प्रारंभिक आकलन में आशंका जताई जा रही है कि सभी सैटेलाइट नष्ट हो चुके हैं। यह PSLV के तीसरे चरण से जुड़ी लगातार दूसरी विफलता मानी जा रही है इससे पहले मई 2025 में PSLV-C61 मिशन भी इसी तरह की तकनीकी खामी के कारण असफल हुआ था।
उड़ान के शुरुआती कुछ मिनटों तक मिशन पूरी तरह सटीक नजर आया। रॉकेट ने निर्धारित समय पर उड़ान भरी, बूस्टर का सेपरेशन भी योजना के अनुसार हुआ। हालांकि, तीसरे चरण के संचालन के दौरान मिशन कंट्रोल में स्थिति अचानक बदल गई। टेलीमेट्री डेटा में रॉकेट के मार्ग से हटने के संकेत मिलने लगे और यान अपने अक्ष पर असामान्य रूप से घूमने लगा। अंतरिक्ष की वैक्यूम में इतनी तेज गति पर मामूली असंतुलन भी पूरे मिशन को विफल करने के लिए पर्याप्त होता है।
प्रारंभिक तकनीकी जानकारी के अनुसार, चैंबर प्रेशर में आई गिरावट के कारण इंजन को वह किकनहीं मिल पाई जो कक्षा में पहुंचने के लिए जरूरी होती है। रॉकेट विज्ञान में यह बेहद संवेदनशील स्थिति होती है जहां एक प्रतिशत की भी गलती पूरे मिशन को खत्म कर सकती है। यही वजह रही कि रॉकेट निर्धारित कक्षा तक पहुंचने के बजाय उससे भटकता चला गया।
इस मिशन का महत्व काफी अधिक था। अन्वेषा सैटेलाइट को लगभग 500 किलोमीटर की ऊंचाई से सैन्य गतिविधि को पहचानने में सक्षम सुपर-आई के रूप में विकसित किया गया था। इसके अलावा, AayulSAT नामक उपग्रह भी इस मिशन का हिस्सा था जिसे भारत के पहले ऑर्बिटल फ्यूल स्टेशन के रूप में देखा जा रहा था जहां भविष्य में उपग्रहों को अंतरिक्ष में ही ईंधन उपलब्ध कराया जा सके। अब आशंका है कि ये सभी उपग्रह पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश के दौरान जलकर नष्ट हो जाएंगे।
ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि एजेंसी इस विफलता के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर रही है ताकि मूल तकनीकी समस्या की पहचान की जा सके और PSLV जैसे भरोसेमंद प्रक्षेपण यान को दोबारा मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस असफलता के चलते भारत के 2026 के अंतरिक्ष मिशन कैलेंडर पर असर पड़ सकता है।