भोपाल। मध्य प्रदेश के लाखों निवेशकों के रुपए सहारा समूह में फंसे हैं। बुधवार को यह मामला विधानसभा में भी उठा। राघौगढ़ से कांग्रेस विधायक व पूर्व मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने राज्य सरकार पर सदन में अधूरी और भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगाया। सिंह ने इस पूरे मामले ने सरकार से पारदर्शी जवाब की मांग की है।
जयवर्धन सिंह ने सदन में कहा कि मध्य प्रदेश के 9 लाख से ज्यादा छोटे, मध्यम और दैनिक आय वर्ग के निवेशकों की गाढ़ी कमाई सहारा में अटकी हुई है। अब तक करीब 1.55 लाख आवेदनों को ही प्रक्रिया में लिया गया है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। कांग्रेस विधायक के मुताबिक कुल 6,689 करोड़ रुपये की देय राशि में से सिर्फ 355 करोड़ रुपये ही निवेशकों को लौटाए गए हैं, जो कुल रकम का करीब 5 प्रतिशत है।
जयवर्धन सिंह ने मोहन सरकार से पूछा कि शेष 95 प्रतिशत राशि निवेशकों को कब तक वापस मिलेगी।उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 1978 से 2012 के बीच विभिन्न योजनाओं के जरिए छोटे और मध्यम जमाकर्ताओं से लगभग 25 हजार करोड़ रुपये जुटाए गए थे। आज वही लोग अपने ही पैसे के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हो रहे हैं।
कांग्रेस विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि उनके सदन में सवाल का विधिवत लिखित उत्तर नहीं दिया गया। सिंह ने सरकार की ओर से दिए गए जवाब की शैली पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वे विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से लेकर सीएम मोहन यादव और प्रमुख सचिव को लिखित शिकायत करेंगे।
जयवर्द्धन सिंह ने दावा किया कि उनके पास सहारा समूह के खिलाफ 123 एफआईआर दर्ज होने की जानकारी है, जबकि सदन में सिर्फ 4 मामलों का उल्लेख किया गया। उन्होंने इसे गंभीर तथ्य छिपाने का मामला बताया। उन्होंने यह भी पूछा कि प्रदेश में सहारा समूह द्वारा खरीदी गई संपत्तियों को अटैच करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई हुई?
जयवर्द्धन सिंह ने मांग की कि सहारा समूह से जुड़े सभी लंबित दावों की समयबद्ध जांच कराई जाए। मध्य प्रदेश के निवेशकों को शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही इस मामले में दर्ज सभी एफआईआर की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए और जिन अधिकारियों की लापरवाही सामने आए उनकी जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेश के लाखों पीड़ित निवेशकों के साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की लड़ाई सड़क से सदन तक जारी रहेगी।