भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्ष ने केंद्र सरकार की कथित किसान-विरोधी इंडिया–यूएस ट्रेड डील के खिलाफ नारेबाज़ी करते हुए कहा कि कॉरपोरेट हितों के लिए अन्नदाताओं का बलिदान किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। 

प्रदर्शन के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों के बीच आंतरिक खींचतान के कारण प्रदेश के प्रमुख शहरों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर सहित अन्य नगरीय क्षेत्रों के मास्टर प्लान पिछले डेढ़ साल से लंबित पड़े हैं।

सिंघार ने दावा किया कि स्वयं नगरीय प्रशासन मंत्री विधानसभा में स्वीकार कर चुके हैं कि मास्टर प्लान की फाइल लंबे समय से मुख्यमंत्री के पास लंबित है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार की अंदरूनी खींचतान का खामियाजा जनता क्यों भुगते? उन्होंने कहा कि यह देरी नहीं, बल्कि विकास रोकने वाला निर्णय है। सिंघार के अनुसार भाजपा सरकार में मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच तालमेल की कमी के कारण नगरीय प्रशासन को न तो फ्री हैंड मिल पा रहा है और न ही ठोस निर्णय लिए जा रहे हैं। नतीजतन, शहरों की विकास योजनाएं ठप पड़ी हुई है।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान अटका होने का सीधा लाभ अवैध कॉलोनियों को हो रहा है। उनके अनुसार इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहर आज भी स्पष्ट विकास योजना का इंतज़ार कर रहे हैं। नतीजतन अवैध कॉलोनियों का निर्माण लगातार जारी है। 

भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर हुजूर से बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा विधानसभा भवन में कहा कि हमारा मास्टर प्लान तैयार है। उसके लिए हमारी पूरी योजना भी तैयार है। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस संबंध में सारी जानकारी दी है। भोपाल, इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में तैयार किए गए हैं। जो मास्टर प्लान हम बना रहे हैं, उसमें मंडीदीप, सीहोर, विदिशा, राजगढ़, रायसेन आदि क्षेत्रों का भला कैसे हो, इसकी योजना तैयार की जा रही है। 
सिंगरौली में अदाणी समूह की कोल माइंस के लिए पेड़ कटाई के मामले को लेकर भी सदन में हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने कहा कि वर्तमान में पूरी भाजपा अडानी जी के पास गिरवी रखी हुई है। इसी कारण जब भी अडानी जी पर कांग्रेस के विधायक या नेता कोई आरोप लगाते हैं, तो भाजपा नेताओं को आपत्ति होने लगती है।

वहीं, भाजपा विधायक रामनिवास शाह ने कहा कि पेड़ कटाई से सिंगरौली का एक पैसे का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कोल माइंस के लिए पेड़ काटना जरूरी है, क्योंकि बिना कोयले के बिजली और बिना बिजली के पानी संभव नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि पेड़ कटाई के बजाय विस्थापन और मुआवजे के मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए।

कांग्रेस विधायक विपिन जैन ने विधानसभा में पत्रकार सुरक्षा कानून का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को लगातार धमकियां मिल रही हैं और पत्रकारिता करना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने पूछा कि पत्रकार सुरक्षा कानून कब तक लागू किया जाएगा और वर्ष 2023 के बाद अब तक क्या कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री की ओर से जवाब देने के लिए अधिकृत मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर है। इसके लिए अन्य राज्यों में लागू पत्रकार सुरक्षा कानूनों का अध्ययन किया जा रहा है।