भोपाल। मध्य प्रदेश में लगभग 30 हजार आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। आज यानी 25 फरवरी से शुरू हुए इस प्रदेशव्यापी आंदोलन ने राजधानी भोपाल में न्याय यात्रा और सामूहिक हड़ताल के बाद और तेज गति हासिल कर ली है। प्रदर्शन के चलते जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएं प्रभावित हो रहे हैं। इसकी वजह से मरीजों और परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

भोपाल के जयप्रकाश अस्पताल (जेपी अस्पताल) परिसर में करीब तीन हजार कर्मचारी जुटे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी किया। जिसके बाद अस्पताल परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और बैरिकेडिंग कर सभी रास्ते बंद कर दिए गए। कर्मचारियों को गेट पर ही रोक दिया गया जहां लोगों ने विरोध दर्ज कराया।

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प्रदर्शन के दौरान न्याय यात्रा में शामिल एक महिला कर्मचारी अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी। वह अपने ढाई साल के बच्चे के साथ प्रदर्शन में शामिल होने आई थी। साथी कर्मचारियों ने बच्चे को संभाला जबकि महिला को वहीं सामने बने चबूतरे पर लिटाकर इलाज प्राथमिक उपचार दिया गया। इस घटना ने आंदोलन की गंभीरता और कर्मचारियों की व्यथा को और स्पष्ट कर दिया।

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने डायरेक्टर ऑफ हेल्थ सर्विसेज के कार्यालय से मुख्यमंत्री निवास तक न्याय मार्च निकालने की कोशिश की लेकिन प्रशासन ने उन्हें परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी। पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा कि बिना अनुमति किसी भी रैली या मार्च की इजाजत नहीं है। वर्तमान में चल रहे विधानसभा सत्र को देखते हुए कर्मचारियों से अपील की गई कि वे अस्पताल परिसर में ही अपना विरोध समाप्त कर ज्ञापन सौंपें और लौट जाएं।

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इस आंदोलन में एड्स कंट्रोल एम्प्लॉइज यूनियन, जॉइंट डेंगू मलेरिया एम्प्लॉइज यूनियन, ऑल हेल्थ ऑफिसर्स एम्प्लॉइज फेडरेशन, कॉन्ट्रैक्ट आउटसोर्स्ड हेल्थ वर्कर्स यूनियन और नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि शामिल थे। समस्त स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कौरव ने बताया कि 2 फरवरी से संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी लगातार विरोध दर्ज करा रहे हैं लेकिन विभागीय अधिकारियों की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पिछले दो दिनों से कर्मचारी काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध जता रहे थे लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो न्याय यात्रा निकालने का फैसला लिया गया ताकि उनकी आवाज मुख्यमंत्री तक पहुंच सके।

कर्मचारियों की नौ सूत्रीय मांगों में प्रमुख रूप से यह शामिल है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को बिना शर्त स्वास्थ्य विभाग में रिक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियमित किया जाए या संविदा ढांचे में शामिल किया जाए। वे उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर प्रदेश में भी स्थायी नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। सभी आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये तय करने, 1 अप्रैल 2024 से बढ़े वेतन का 11 महीने का बकाया एरियर तत्काल देने और इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी करने की भी मांग उठाई गई।

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इसके अलावा कर्मचारी चाहते हैं कि निजी आउटसोर्स एजेंसियों को हटाकर उनका वेतन सीधे बैंक खातों में डाला जाए। उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह सभी सरकारी छुट्टियों का लाभ मिले और नियमित भर्ती प्रक्रियाओं में आउटसोर्स कर्मचारियों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। साथ ही सभी कर्मचारियों का स्वास्थ्य बीमा कराया जाए और उन्हें ग्रेच्युटी का लाभ भी प्रदान किया जाए।