प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने भाषणों के लिए लोकप्रिय हैं। उनकी ही तरह केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी आक्रामक भाषण शैली को अपनाया है। एक बार ऐसा भी हुआ है जब पीएम नरेंद्र मोदी ने बीजेपी के इन स्टार प्रचारक नेताओं के लंबे भाषणों पर आपत्ति जताई थी। यह खुलासा खुद कृषिमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीएम नरेंद्र मोदी पर लिखी अपनी किताब 'अपनापा' में किया है।
शिवराज सिंह चौहान की किताब 'अपनापा' का 26 मई को दिल्ली में लोकार्पण हो रहा है। इस किताब में शिवराज सिंह चौहान ने कई राजनीतिक बातों का खुलासा किया है। यह भी कि इंदौर में 2023 में आयोजित प्रवासी भारतीय दिवस कार्यक्रम की शाम को पीएम मोदी ने फोन कर सीएम शिवराज और केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के लंबे भाषणों पर आपत्ति जताई थी। पीएम मोदी ने आयोजन की कमियां भी गिनाई थी।
कृषिमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा है कि 2023 में इंदौर में प्रवासी भारतीय दिवस खत्म होने के बाद उन्हें पीएम का फोन आया और उन्होंने पूछा कि कार्यक्रम पर क्या प्रतिक्रियाएं हैं? तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीएम से कहा कि कार्यक्रम अच्छा था और लोग व्यवस्थाओं से संतुष्ट थे। तब मोदी ने कहा कि मंच पर तीन राष्ट्रपति बैठे होने के बावजूद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का लंबा भाषण देना ठीक नहीं था। मंच पर भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफान अली व सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोषी मौजूद थे। इनके सामने बड़े भाषण पीएम मोदी को रास नहीं आए। पीएम मोदी ने सलाह दी थी कि ‘ऐसी स्थिति में भाषण छोटा होना चाहिए। भाषण में ज्यादा समय लेना उचित नहीं है। पीएम मोदी ने अव्यवस्थाओं का जिक्र करते हुए बताया था कि हॉल में जगह कम पड़ रही थी। कुछ अधिकारी मेहमानों के लिए आरक्षित सीटों पर बैठ गए थे। भीड़ की वजह से कई प्रतिनिधि सम्मेलन के बाहर रहे गए थे जिस कारण वे नाराज थे।
किताब में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीएम मोदी को ‘ऋषि’, ‘समाज सुधारक’, ‘तपस्वी’, ‘महापुरुष’ जैसी उपमाएं देते हुए कई राजनीतिक घटनाओं का खुलासा किया है। जैसे, 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की तो उसमें शिवराज का नाम नहीं था। तब एक जनसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा था, 'अगर हम नहीं रहे तो हमें बहुत याद किया जाएगा।' इस पर हुए राजनीतिक बवाल पर स्पष्टीकरण देते हुए शिवराज ने लिखा कि विपक्ष ने इस बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया और यह प्रचारित किया कि चौहान का राजनीतिक करियर खत्म हो गया है। तब पीएम मोदी ने उन्हें फोन कर बहुत ही नरमी से पूछा, 'आप इतने चिंतित क्यों हो? अगर आपका कोई आध्यात्मिक मार्गदर्शक या गुरु है, जिनका आप सम्मान करते हैं, तो उनके पास जाकर मार्गदर्शन लें। कुछ समय एकांत में बिताएं और अपने मन को शांत, संतुलित एवं स्थिर रखें।'
शिवराज सिंह चौहान इसके बाद गंगा किनारे गए थे। इसी तरह नए सीएम मोहन यादव के शपथ ग्रहण में पीएम मोदी ने शिवराज के पास जा कर धीरे से कहा था कि समय निकालकर दिल्ली आओ, आपसे कुछ बात करनी है। इसके 6 महीने बाद जून 2024 में वह कैबिनट मंत्री बने थे। शिवराज का आकलन है कि तब ही उन्हें पता चल गया था कि प्रधानमंत्री ने शपथ ग्रहण समारोह में ही उन्हें नया काम देने की योजना बना ली थी।
एमपी के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपनी किताब में जितनी पीएम मोदी की तारीफ की है, उतना ही समकालीन घटनाओं पर बने नेरेशन पर राजनीति स्पष्टीकरण देने का काम किया है।
चर्चा में सीएम मोहन यादव के पांच सौ रुपए
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को सिंगरौली पहुंचे थे। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वे देर शाम को वे प्रोटोकॉल तोड़कर सड़कों पर घूमते नजर आए। रास्ते में चाट की दुकान देखकर वे दुकान पर पहुंच गए। उन्होंने दुकानदार से कहा, समोसा बनाओ। सीएम डॉ. मोहन यादव ने आधा समोसा खाया। जब उन्होंने कीमत के बारे में पूछा तो दुकानदार ने इसकी कीमत 10 रुपए बताई। सीएम मोहन यादव ने कहा कि 10 रुपये में क्या होता है और उन्होंने मोबाइल निकाल कर 500 रुपए ट्रांसफर कर दिए।
सीएम डॉ. मोहन यादव का यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ। यह भी कहा गया कि पश्चिम बंगाल चुनाव में पीएम मोदी ने झाड़ग्राम में रैली के बाद झालमुड़ी खाई उन्होंने दुकानदार को 10 रुपये दिए थे जबकि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संवेदनशीलता दिखाते हुए आधे समोसे के भी 500 रुपए दिए। लोगों ने प्रतिक्रिया में कहा कि ऐसी ही चिंता किसानों की भी की जाए तो अच्छा होगा।
सांसद वीडी शर्मा की पत्नी ने बात तो सही कही
पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दामों को लेकर सांसद वीडी शर्मा की पत्नी स्तुति मिश्रा की एक पोस्ट ने राजनीतिक पारा चढ़ा दिया। बवाल हो गया। स्तुति मिश्रा ने शनिवार सुबह फेसबुक पर तंज में लिखा था- हम उस समय में है कि वो दिन दूर नहीं जब बैंक होम लोन, कार लोन, बिजनेस लोन के साथ पेट्रोल और डीजल लोन भी उपलब्ध कराएगा 10 प्रतिशत ईएमआई के साथ। ये दौर बड़ा खराब है इतिहास का। लड़ाई किसी की, युद्ध किसी का नुकसान आम जनता का।
इस कटाक्ष को सरकार पर अपनों का ही हमला माना जाने लगा। तब राजनीतिक हमले बढ़े तो सफाई देते हुए स्तुति मिश्रा ने लिखा- अंतराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे युद्ध के चलते तेल आपूर्ति में कमी और सभी तेल पदार्थों के दाम बढ़ने का कारण हम सब है। मेरी पोस्ट उन सभी लोगों के लिए थी जो इस राष्ट्रीय समस्या को दरकिनार करके माननीय प्रधानमंत्री जी के आवाहन पर नहीं चल रहे, हम सब देश वासियों की ये नैतिक जिम्मेदारी है की हम सभी उन नियमों को पूर्ण रूप से पालन करें जो तेल की खपत को कम करें और इस समस्या के समय राष्ट्रीय सहभागिता दें। मेरी पोस्ट सभी के लिए एक आगामी समस्या के विषय में चेतावनी थी, परंतु इसे काफी लोगों ने गलत नजरिए से पेश किया और जिन्होंने इसे समझा उन सबको साधुवाद। मेरा सभी से आग्रह है की हम इस समय को धीरज से निकालें। कृपया पोस्ट को पढ़े, समझे और समझदार बने।
जितनी बड़ी पहली टिप्पणी थी उससे तीन गुना ज्यादा सफाई देनी पड़ी। हालांकि कमेंट में लोगों न कहा कि राजनीति की बात अलग है, वीडी शर्मा की पत्नी ने बात तो सही कही थी। इस तर्क के साथ सोशल मीडिया पर लोग उनका समर्थन भी कर रहे हैं।
राज्यसभा चुनाव, तीसरी सीट तोहफा या हक
राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। चुनाव आयोग के अनुसार राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना 1 जून को जारी होगी, जबकि उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। 11 जून नाम वापस लेने की अंतिम तारीख है। आवश्यक होने पर मतदान 18 जून 2026 को होगा।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें बीजेपी के जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी तथा कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का कार्यकाल खत्म होने के कारण रिक्त हो रही है। विधानसभा में बीजेपी के संख्या बल को देखते हुए पार्टी दो सीटों पर मजबूत स्थिति में मानी जा रही है। कांग्रेस अपनी एक सीट बचाने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक आकलन है कि बीजेपी तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारेगी और इसे जीत कर केंद्रीय नेतृत्व को तोहफा दे सकती है। कांग्रेस भी बीजेपी की इस रणनीति से आशंकित है। यही कारण है कि कांग्रेस के लिए आसान दिखने के बावजूद यह एक सीट बचाना चुनौती बनती नजर आ रही है। कांग्रेस की चिंता का सबसे बड़ा कारण संभावित क्रॉस वोटिंग है। यदि पार्टी के कुछ विधायक अलग रुख अपनाते हैं तो उसके हाथ से यह सीट निकल सकती है। दतिया सीट से विधायक रहे राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। हालांकि विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर न्यायालय की रोक है और बीना विधायक निर्मला सप्रे से जुड़ा मामला लंबित होने के कारण प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोट जरूरी हैं। संख्या के हिसाब से कांग्रेस फिलहाल इस आंकड़े तक पहुंचती दिख रही है, लेकिन यदि क्रॉस वोटिंग हुई तो समीकरण बदल सकते हैं। इसलिए ऐसे प्रत्याशी के चयन पर माथापच्ची हो रही है जिसके नाम पर क्रास वोटिंग रोकी जा सके।