चल नहीं रही है, इसलिए लाल हैं कैलाश–प्रह्लाद
प्रदेश के दो कद्दावर नेता। दोनों मैदान में भी उतने ताकतवर जितने दिल्ली में लेकिन बीते तीन सालों से जैसे हाथ बांध दिए गए हैं। दोनों अपने से काफी जूनियर डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट में मंत्री हैं लेकिन मन का कर नहीं पा रहे हैं। इस नाराजगी में लाल है। और अब राजनीति की लाल किताब कहती है कि दोनों के सितारे कुछ नई राह दिखाने वाले हैं। इस राजनीतिक भविष्यवाणी का आधार बीते चार दिनों का घटनाक्रम है।
बीते सप्ताह कुछ तस्वीरें वायरल हुईं। गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की तस्वीरें। इन तस्वीरों में सीएम डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल दिखाई दे रहे हैं जो गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करने दिल्ली गए थे। लेकिन इसके बाद दो तस्वीरें और आईं। ये तस्वीरें थीं गृहमंत्री अमित शाह ने नगरीय प्रशासन और विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल की। बताया गया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद गृहमंत्री के कार्यालय से दोनों मंत्रियों को बुलावा आया था और वे तुरंत दिल्ली पहुंचे थे।
इन तस्वीरों के राजनीतिक मायने निकाले गए। कैलाश विजयवर्गीय बीते कुछ समय से राजनीतिक परिस्थितियों में घिरे हुए हैं और इस दौरान काफी तीखा बोले भी है। उनके इस कहे को उनकी नाराजगी से जोड़ा गया है। ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल भी खुश नहीं बताए जा रहे हैं। माना गया कि गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात में इसी नाराजगी और मुख्यमंत्री के साथ समन्वय पर बात हुई होगी।
लेकिन जब 2 मार्च को निमाड़ में कृषि कैबिनेट हुई तो दोनों मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल उसमें शामिल नहीं हुए। कैलाश विजयवर्गीय तो बैठक में न हो कर भगोरिया जैसे सांस्कृतिक मेले में शामिल हुए थे। जबकि प्रह्लाद पटेल भी किसी अत्यावश्यक कार्य में व्यस्त नहीं थे।
इन परिस्थितियों के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि मध्य प्रदेश में कुछ बड़ा राजनीतिक बदलाव होने जा रहा है। संभव है कि बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में इन नेताओं को शामिल किया जाए। दूसरा, आकलन है कि केंद्र ने इन दोनों मंत्रियों से कहा है कि वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ समन्वय बना कर कार्य करें। यदि ऐसा है तो आगे भी इन नेताओं के गुस्से और आक्रेश का लाल रंग बना रहेगा। बीजेपी की राजनीतिक हांडी में जो कुछ पक रहा है उसका खुलासा जल्द हो सकता है।
रावण से तुलना फिर भी हरी है उम्मीद
क्या कोई रावण से तुलना के बाद भी खुश हो सकता है? वह भी सनातन में आस्था रखने वाला? लेकिन ऐसा हुआ। पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की तुलना रावण से की गई वह भी बीजेपी विधायक द्वारा लेकिन इससे कोई नाराज न हुआ बल्कि उम्मीद हरिया गई।
बात डॉ. नरोत्तम मिश्रा द्वारा डबरा में बनवाए गए नवग्रह मंदिर से जुड़ी है। इस मंदिर की जमीन को लेकर विवाद है। इस पर जब पिछोर विधायक प्रीतम लोधी से सवाल पूछा गया तो उन्होंने जमीन विवाद से तो इंकार कर दिया लेकिन इतना जरूर कहा कि एक रावण था जिसने नौ ग्रह को एक लाइन में खड़ा कर दिया और अब आज के समय में डॉ. नरोत्तम मिश्र हैं जिन्होंने नौ ग्रहों को एक जगह खड़ा कर दिया है।
इस बयान के बाद विधायक प्रीतम लोधी की न आलोचना हुई और न ही नरोत्तम समर्थक नाराज हुए। बल्कि वे तो खुश हैं। स्वयं डॉ. नरोत्तम मिश्रा सहित उनके समर्थकों की उम्मीद हरी हो गई है कि राजनीतिक रूप से हाशिए पर पड़े पूर्व मंत्री का भाग्य करवट लेगा और वे फिर से मुख्यधारा में लौट आएंगे। इस आस के तहत ही डॉ. नरोत्तम मिश्रा को पराजित करने वाले विधायक राजेंद्र भारती के कोर्ट में जारी केस पर नजर रखी जा रही है। इंतजार किया जा रहा है कि कब दिन फिरेंगे और कब पार्टी नेतृत्व शिवराज सरकार के संकटमोचक कहे जाने वाले नेता को फिर से सक्रिय करेगा।
पीले पात की तरह झर गया रुतबा
राजनीति ने रसूख अब ऐसा हो गया है कि एक बार गया तो अपना सगा भी नहीं पूछता। ऐसा ही कुछ अनुभव पूर्व संगठन मंत्री हितानंद शर्मा के साथ हुआ। वे बीत माह तक बीते माह तक एमपी बीजेपी की राजनीति के सूत्रधार रहे हैं। उनकी मर्जी के बिना कोई बड़ा निर्णय नहीं होता था। टिकट वितरण से लेकर संगठन में नियुक्तियों तक संगठन महामंत्री की राय मायने रखती है और हितानंद शर्मा ने भी अपनी तरह से राजनीति को आकार दिया था।
फिर एकाएक निर्णय हुआ और जनवरी के आखिरी दिन पद से हटा दिए गए। संघ ने उन्हें मध्य प्रांत में सह बौद्धिक प्रमुख बनाया है। उनकी जगह नई नियुक्ति अब तक हुई नहीं है। माना गया कि अपनी कार्यप्रणाली के कारण वे शिकायतों से घिर गए थे और संघ ने इन शिकायतों को महत्व देने हुए उन्हें हटा दिया। इसतरह वे पीले पात की तरह मुख्य राजनीति से झर गए। उनके पास अब संगठन महामंत्री जैसा पद नहीं है तो उनके आसपास भीड़ नहीं होती। यहां तक कि हितानंद शर्मा की माता का बीते दिनों देहांत हुआ तब भी सांत्वना देने वाले हाथ गिने चुने ही थे।
पॉलिटिक्स का काला रंग... निशाने पर दो मंत्री
राजनीति के लाल, हरे, पीले रंगों के बीच काले रंग ने भी असर दिखाया है। राजनीति का यह काला रंग गोकशी और लड़कियों के यौन उत्पीड़न, नशे के कारोबार जैसे काले धंधे से जुड़ा है। भोपाल में ड्रग तस्करी और रेप के आरोपी यासीन और शाहवर मछली के परिवार का नाम आया था। मछली परिवार संघ से जुड़ा था तथा आरोप लगा था कि भोपाल के दो मंत्रियों विश्वास सारंग तथा कृष्णा गौर का उन्हें संरक्षण है। सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोप में जिला प्रशासन ने मछली परिवार की तीन मंजिला कोठी को अवैध मानते हुए गिरा दिया था।
इसके बाद नगर निगम के स्लाटर हाउस में गो कशी तथा गौ मांस की व्यापार का मामला सामने आया था। 26 टन गौमांस पकड़े जाने पर स्लाटर हाउस को चला रहे असनम चमड़ा को गिरफ्तार किया गया है। असलम चमड़ा को भी बीजेपी के नेताओं के संरक्षण का आरोप लगा है। ये दोनों मामले बीजेपी के कोर इश्यू है। इन पर पार्टी की अंदरूनी राजनीति भी गर्माई।
इस मामले पर राजनीतिक दांवपेंच का खुलाया न होता यदि रेलवे के एक पूर्व कर्मचारी राजेश तिवारी के वीडियो वायरल न होते और गिरफ्तारी नहीं होती। आरोपी राजेश तिवारी पर गैर-कानूनी तरीके से 3 लाख रुपए मांगने का आरोप है। राजेश तिवारी का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह गोमांस तस्करी के आरोपी असलम चमड़े के करीबी को ब्लैकमेल कर पैसे लेते दिखाई दे रहा है। इस वीडियो के बाद समझा जा रहा है बीजेपी के ही नेताओं ने स्थानीय मंत्रियों के नाम को उछाला ताकि यहां के राजनीतिक समीकरण बदलें। राजनीति के इस काले रंग पर कई खुलासे होना बाकी हैं।