इंडोनेशिया के उत्तरी मोलुक्का सागर क्षेत्र में गुरुवार सुबह शक्तिशाली भूकंप के झटके महसूस किए गए। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.4 मापी गई थी। यह झटके स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 6:48 बजे दर्ज किए गए थे। भूकंप का केंद्र टेरनेट के पास मोलुक्का सागर में था। इसकी गहराई 10 से 35 किलोमीटर के बीच बताई गई है। भूकंप के तुरंत बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई। हालांकि, बाद में स्थिति सामान्य होने पर हटा लिया गया।
भूकंप के तेज झटकों से उत्तरी मोलुक्का और आसपास के तटीय इलाकों में अफरा तफरी मच गई थी। लोग डर के कारण घरों से बाहर निकल आए और कई स्थानों पर इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबरें भी सामने आई थी। साथ ही एक व्यक्ति की मौत की भी सूचना सामने आई है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर नुकसान का पूरा आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को तुरंत ऊंचे स्थानों पर जाने और समुद्र से दूर रहने की सलाह दी है।
यह भी पढ़ें:भोपाल में BJP MLA का वेयरहाउस ब्लैकलिस्ट, शासकीय खरीदी शुरु होने पहले मिला 6,522 क्विंटल गेहूं
शुरुआती रिपोर्ट में भूकंप की तीव्रता 7.8 बताई गई थी। हालांकि, बाद में संशोधित कर इसे 7.4 कर दिया गया था। अमेरिकी सुनामी चेतावनी प्रणाली के अनुसार, भूकंप के केंद्र से लगभग 1000 किलोमीटर के दायरे में समुद्री लहरों का खतरा था। इसके चलते फिलीपींस और मलेशिया के तटीय इलाकों के लिए भी अलर्ट जारी किया गया था। भूकंप के बाद 5 तीव्रता तक के आफ्टरशॉक्स भी दर्ज किए गए थे।
इंडोनेशिया में भूकंप की घटनाएं आम हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यह रिंग ऑफ फायर नामक अत्यधिक सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है। इस क्षेत्र में इंडो-ऑस्ट्रेलियन, यूरेशियन और पैसिफिक जैसी बड़ी टेक्टोनिक प्लेट्स लगातार गतिशील रहती हैं। इनके टकराव से भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं।
यह भी पढ़ें:AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया, संसद में पार्टी की ओर से बोलने पर भी रोक
इतिहास गवाह है कि इंडोनेशिया कई बड़े भूकंप और सुनामी झेल चुका है। साल 2004 में हिंद महासागर में आए विनाशकारी भूकंप और सुनामी में 2.3 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इनमें बड़ी संख्या इंडोनेशिया के आचे प्रांत की थी। वहीं, साल 2018 में सुलावेसी में आए भूकंप और सुनामी में हजारों लोगों की जान गई थी। वहीं, साल 2022 में पश्चिम जावा के सियानजुर में आए 5.6 तीव्रता के भूकंप में भी 600 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।