वेनेजुएला को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर तीखे तेवर दिखाए हैं। अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को खुली चेतावनी देते हुए ट्रंप ने कहा है कि अगर उन्होंने जो सही है वह नहीं किया तो उन्हें निकोलस मादुरो से भी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब वेनेजुएला सत्ता परिवर्तन के बाद बेहद नाजुक स्थिति से गुजर रहा है।

द अटलांटिक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका वेनेजुएला में नई सत्ता से बड़े बदलाव की उम्मीद कर रहा है। उनका कहना था कि अगर सहयोग नहीं मिला तो कड़े कदम उठाने से भी अमेरिका पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि अमेरिका उन लोगों से बात कर रहा है जिन्होंने हाल ही में शपथ ली है और जरूरत पड़ी तो दूसरा हमला भी विकल्प में है। उनके मुताबिक सभी तैयारियां पूरी हैं हालांकि वे मानते हैं कि शायद इसकी जरूरत न पड़े।

वेनेजुएला में हालात तब पूरी तरह पलट गए जब राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हमले के बाद न्यूयॉर्क की जेल में रखा गया। इसके बाद वेनेजुएला की सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर 2018 से उपराष्ट्रपति रहीं डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त किया और उन्हें तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति के सभी अधिकार सौंप दिए। इस फैसले के साथ ही देश में सत्ता संतुलन बदल गया और वेनेजुएला एक ट्रांजिशनल दौर में प्रवेश कर गया।

शुरुआत में ट्रंप ने डेल्सी रोड्रिग्ज की सराहना की थी और उनके अंतरिम राष्ट्रपति बनने पर सहमति जताई थी। लेकिन सत्ता संभालने के बाद डेल्सी ने यह साफ कर दिया कि वेनेजुएला के वैध राष्ट्रपति अब भी मादुरो ही हैं और देश अपने तेल समेत सभी प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करेगा। यही रुख अब अमेरिका के साथ टकराव की वजह बनता दिख रहा है।

न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक अन्य इंटरव्यू में ट्रंप ने संकेत दिया कि अगर डेल्सी रोड्रिग्ज अमेरिका की शर्तों पर काम करने को तैयार हो जाती हैं, तो वेनेजुएला में अमेरिकी सेना तैनात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका के पास सभी विकल्प खुले हैं। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि वेनेजुएला में सही समय पर चुनाव हों और सत्ता परिवर्तन के बाद हालात मौजूदा स्थिति से बेहतर हों। 

ट्रंप ने वेनेजुएला को लेकर अपने इरादे और भी स्पष्ट करते हुए कहा कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल समेत अन्य संसाधनों पर पूरी पकड़ चाहता है। उनके मुताबिक सत्ता परिवर्तन के बाद जो कुछ भी होगा वह देश के लिए बेहतर साबित होगा। इसी क्रम में उन्होंने दूसरे हमले की संभावना से भी इनकार नहीं किया और कहा कि अगर अमेरिका का सहयोग नहीं मिला तो वेनेजुएला पर दोबारा कार्रवाई हो सकती है।

इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वेनेजुएला में अमेरिकी दखल को लेकर सफाई दी है। CBS न्यूज को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि मौजूदा हालात को अमेरिका का कब्जा नहीं कहा जा सकता। उन्होंने माना कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास हर स्थिति से निपटने के कई विकल्प हैं लेकिन फिलहाल जमीन पर अमेरिकी ऑक्युपेशन जैसी कोई स्थिति नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले 3 जनवरी को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर वेनेजुएला पर अमेरिकी कब्जे की बात कहकर विवाद खड़ा कर दिया था।

ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने डेल्सी रोड्रिग्ज से बातचीत की है। ट्रंप के मुताबिक, रोड्रिग्ज वेनेजुएला के लोगों की जीवन स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए अमेरिका की अपेक्षाओं पर काम करने को तैयार नजर आई हैं। हालांकि, डेल्सी ने सार्वजनिक रूप से मादुरो को सत्ता से हटाने के अमेरिकी कदमों की आलोचना की है और मांग की है कि मादुरो को वापस वेनेजुएला भेजा जाए ताकि राजनीतिक संकट का समाधान घरेलू स्तर पर किया जा सके।

रविवार को ट्रंप ने वेनेजुएला में प्रशासन और स्थिरता के लिए एक विशेष अमेरिकी टीम के गठन का ऐलान भी किया। इस टीम में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम का मकसद वेनेजुएला में कानून-व्यवस्था बहाल करना, सरकारी संस्थानों को दोबारा सक्रिय करना, तेल, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों को स्थिर करना और सत्ता परिवर्तन के दौरान देश को संभालने में मदद करना बताया गया है।

वेनेजुएला के अलावा ट्रंप ने अन्य देशों को भी अल्टीमेटम देते हुए बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड चाहिए, क्यूबा झुकने को तैयार है और वहां किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। कोलंबिया को लेकर उन्होंने कहा कि वह देश एक बीमार व्यक्ति” के हाथों में है जो ज्यादा दिन नहीं रहेगा। जबकि, ट्रंप ने मेक्सिको के साथ भी कुछ कदम उठाने के संकेत दिए हैं।