ढाका। अंडमान सागर में बड़ा हादसा हुआ है। रोहिंग्या शरणार्थियों को मलेशिया ले जा रहा एक जहाज डूब गया। जहाज पर रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशी नागरिकों समेत लगभग 250 से ज्यादा लोग सवार थे। इस घटना में कम से कम नौ लोगों को बचा लिया गया है, जबकि करीब 250 अन्य लोगों के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।
बांग्लादेश के अखबार 'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के मुताबिक इस नाव में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों सहित लगभग 250-280 लोग सवार थे। बताया जा रहा है कि समुद्र में कई दिन बिताने के बाद यह नाव पलट गई। माना जा रहा है कि इस घटना का पता तब चला जब आसपास पेट्रोलिंग कर रहे जहाजों ने समुद्र से नौ लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया।
एक प्रेस रिलीज में बांग्लादेश कोस्ट गार्ड के मीडिया अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर सब्बीर आलम सुजान ने बताया कि बांग्लादेश का झंडा लगा जहाज MT मेघना प्राइड चटगांव से इंडोनेशिया जा रहा था। रेस्क्यू के बाद आधी रात के करीब हादसे में बचे लोगों को बांग्लादेश कोस्ट गार्ड के गश्ती जहाज़ 'मंसूर अली' को सौंप दिया गया।
बांग्लादेश के अखबार दे डेली स्टार के अनुसार इस हादसे में बचे हुए लोगों ने मानव तस्करी और उस जानलेवा सफर के रोंगटे खड़े कर देने वाले किस्से सुनाए। रफ़ीकुल इस्लाम नाम का एक रोहिंग्या इस घटना में बच गया। उसने बताया कि 2 अप्रैल को कुतुपालोंग बाज़ार में उसे नौकरी का झांसा देकर फंसाया गया था। उसे टेकनाफ़ के कछोपिया यूनियन के राजारछारा इलाके में एक घर में ले जाया गया, जहां उसे 20 से 25 अन्य लोगों के साथ अमानवीय हालात में कैद करके रखा गया था।
इस शख्स ने आरोप लगाया कि जब भी पीड़ित भागने की कोशिश करते थे तो उनके साथ बुरा बर्ताव किया जाता था। इसने यह भी बताया कि उस इलाके में कई घरों का इस्तेमाल तस्करी करके लाए गए लोगों को कैद करने के लिए किया जाता था। रफीकुल के अनुसार बाद में जहाज पर और भी यात्री चढ़ाए गए जिससे कुल संख्या लगभग 280 हो गई। इनमें 13 क्रू सदस्य और तस्कर, 21 रोहिंग्या महिलाएं और चार बच्चे शामिल थे। इन यात्रियों में से लगभग 150 रोहिंग्या थे, जबकि बाकी बांग्लादेशी थे।