अमेरिका। डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी के साथ ही अमेरिका की इमिग्रेशन नीति में अभूतपूर्व सख्ती देखने को मिल रही है। नई प्रशासनिक दिशा के तहत सुरक्षा और नियमों के उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस अपनाया गया है। इसका सीधा असर वीजा धारकों खासकर भारतीयों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर पड़ा है।
अमेरिकी विदेश विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बीते एक साल में 1 लाख से अधिक वीजा रद्द किए जा चुके हैं। स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बताया कि वीजा कैंसिलेशन के मामलों में करीब 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी स्तर पर नियम तोड़ने वालों को राहत नहीं मिलेगी।
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वीजा रद्द होने के प्रमुख कारणों में सबसे ऊपर वीजा ओवरस्टे का मामला रहा है। वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में रुकने वालों पर सख्त कार्रवाई की गई। इसके अलावा DUI यानी नशे में गाड़ी चलाने के मामलों में भी कड़ा रुख अपनाया गया है। इसमें H-1B और L-1 जैसे विशेषज्ञ वीजा धारक भी कार्रवाई से नहीं बच सके। चोरी, मारपीट और ड्रग्स से जुड़ी आपराधिक गतिविधियां भी वीजा रद्द होने की बड़ी वजह बनी।
राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी अमेरिकी प्रशासन का रुख सख्त हुआ है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी विदेश नीति के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों खासकर गाजा युद्ध पर फिलिस्तीन के समर्थन में सक्रिय छात्रों और ग्रीन कार्ड धारकों को भी निर्वासन का सामना करना पड़ सकता है।
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इस सख्ती का सबसे गहरा असर भारतीय नागरिकों पर देखने को मिला है। भारत सरकार द्वारा संसद में साझा आंकड़ों के अनुसार, 21 नवंबर 2025 तक 3,155 भारतीयों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया था। इसके मुकाबले साल 2024 में यह संख्या 1,368 और 2023 में केवल 617 थी। यानी महज दो सालों में डिपोर्टेशन के मामलों में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।
छात्रों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। जनवरी 2025 से अब तक 300 से अधिक भारतीय छात्रों के वीजा रद्द किए जा चुके हैं और हजारों छात्रों के SEVIS रिकॉर्ड टर्मिनेट कर दिए गए हैं। अब वीजा आवेदकों के सोशल मीडिया प्रोफाइल, ऑनलाइन पोस्ट और डिजिटल गतिविधियों की गहन जांच की जा रही है जिससे छात्रों और प्रोफेशनल्स में असमंजस का माहौल है।
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इमिग्रेशन नियमों में बड़े बदलाव भी किए गए हैं। H-1B वीजा को लेकर केवल लॉटरी सिस्टम पर निर्भरता कम की जा रही है और अब चयन में उच्च कौशल, वेतन स्तर और नियमों के सख्त पालन को प्राथमिकता दी जा रही है। H-1B और H-4 वीजा के लिए भारत में होने वाली स्टैंपिंग प्रक्रिया को भी और कड़ा किया गया है। साथ ही इसमें सोशल मीडिया वेरिफिकेशन को अनिवार्य किया गया है।
कुल मिलाकर, डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद अमेरिका की नई इमिग्रेशन नीति ने यह साफ कर दिया है कि अब वीजा नियमों में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। इसका असर आने वाले समय में अमेरिका जाने के इच्छुक छात्रों, प्रोफेशनल्स और प्रवासियों पर और गहराने की संभावना है।
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