उज्जैन में 509 करोड़ की सीवरेज परियोजना पर छाए संकट के बादल, ब्लैकलिस्ट होने के बाद टाटा कंपनी ने छोड़ी साइट

इंदौर में 509 करोड़ लागत वाली सीवरेज परियोजना पर संकट के बादल छा गए हैं। ब्लैकलिस्टेड टाटा प्रोजेक्ट्स ने काम अधूरा छोड़ साइट बंद कर दिया है।

Updated: Jan 13, 2026, 01:44 PM IST

उज्जैन। उज्जैन के समय से आठ साल पीछे चल रही 509 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी सीवरेज परियोजना पर एक बार फिर से संकट के बादल छा गए हैं। हैदराबाद की टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद अधूरे काम से हाथ खींचते हुए साइट पर काम पूरी तरह बंद कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि इस मनमानी के बावजूद नगर निगम ने न तो ठेका निरस्त किया है और न ही अब तक कंपनी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई शुरू की है।

परियोजना की निगरानी कर रही कंसल्टिंग फर्म ने नगर निगम को अवगत कराया है कि टाटा प्रोजेक्ट्स ने अपने पेटी कॉन्ट्रेक्टरों और मटेरियल सप्लायरों के 20 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान रोक रखे हैं। इससे न सिर्फ साइट पर काम ठप हो गया है बल्कि शहर के अन्य विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

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गौरतलब है कि सीवरेज परियोजना में लगातार देरी, वादाखिलाफी और बेहद धीमी प्रगति को देखते हुए नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने 19 नवंबर 2025 को टाटा प्रोजेक्ट्स को तीन सालों के लिए निगम के सभी विभागों से ब्लैकलिस्ट कर दिया था। हालांकि, उस समय ठेका निरस्त नहीं किया गया था और कंपनी को अंतिम अवसर देते हुए काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते चले गए।

शहर को खुले में बहते सीवरेज से मुक्ति दिलाने और शिप्रा नदी की शुद्धि के उद्देश्य से शुरू की गई इस परियोजना का अब भी 9.5 प्रतिशत काम अधूरा है। जबकि, ठेके की शर्तों के अनुसार यह परियोजना 7 नवंबर 2017 को आवंटित की गई थी और दो सालों में यानी 20 नवंबर 2019 तक पूरी हो जानी थी। आठ सालों में आठ बार समयसीमा बढ़ाने के बावजूद लगभग 10 प्रतिशत काम अब भी बचा है।

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परियोजना के तहत 60 हजार हाउस सर्विस कनेक्शन का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन अब तक केवल 15,158 कनेक्शन ही हो पाए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच ही टाटा प्रोजेक्ट्स को 46.23 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। इसके बावजूद कंपनी ने अपने वेंडरों और ठेकेदारों को भुगतान नहीं किया। इसका सीधा असर सिंहस्थ-2028 से जुड़े सड़क चौड़ीकरण, पाइपलाइन समन्वय और अन्य विकास कार्यों पर भी पड़ रहा है।

नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यदि तत्काल काम शुरू नहीं किया गया तो इसे अनुबंध शर्तों का उल्लंघन मानते हुए कंपनी की बैंक गारंटी जब्त की जा सकती है और ठेका निरस्त कर शेष कार्य किसी अन्य एजेंसी से कराया जाएगा।

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यह पहली बार नहीं है जब कंपनी ने काम रोका हो। जुलाई 2024 में भी नगर निगम द्वारा 37 करोड़ रुपये के बिलों का भुगतान रोके जाने पर टाटा प्रोजेक्ट्स ने काम बंद कर दिया था। उस समय भुगतान होने के बाद ही कार्य दोबारा शुरू हुआ था। तब कंपनी ने निगम पर बिलों के भुगतान में देरी, कथित पेनाल्टी और सहयोग न मिलने के आरोप लगाए थे।

महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि टाटा प्रोजेक्ट्स को इस सीवरेज परियोजना के लिए 80 प्रतिशत से अधिक भुगतान पहले ही मिल चुकी है और वर्तमान में ब्लैकलिस्टेड भी है। ऐसे में मामला अदालत तक जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

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पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह है कि परियोजना को समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे नगर निगम के किसी भी अधिकारी या निगरानी कर रही कंसल्टिंग फर्म के खिलाफ अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है। इसकी वजह से इस बहुप्रतीक्षित और अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना का भविष्य और भी अनिश्चित नजर आ रहा है।