भारतीय डेलिगेशन जल्द ही ट्रेड डील करने अमेरिका जाने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले हफ्ते ही ईरान युद्ध को लेकर पीएम मोदी से 40 मिनट तक बात की थी। इन खबरों को भारतीय टीवी मीडिया ने जमकर उछाला था। लेकिन अब उन्हीं ट्रंप ने भारत को नर्क का द्वार करार दिया है। ट्रंप ने भारतीयों को लेकर जहरीला पोस्ट शेयर किया है जिसमें कहा गया है कि भारतीय लोग अमेरिका में बच्चों को जन्म देकर नागरिकता लेते हैं और फिर परिवार को बुला लेते हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक चिट्ठी पोस्ट की है, जिसमें जन्म के आधार पर नागरिकता देने की आलोचना करके भारत-चीन समेत कई देशों पर विवादित टिप्पणी की गई है। इस पत्र में उन्होंने कैलिफोर्निया के टेक सेक्टर में भारत और चीन के लोगों के दबदबे का दावा किया। उन्होंने कहा कि जन्म के आधार पर नागरिकता से प्रवासी अपने बच्चों को नागरिकता दिलाते हैं। फिर पूरा परिवार अमेरिका आ जाता है।
ट्रंप इतने पर नहीं रुके बल्कि उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे का फैसला अदालतों या वकीलों से नहीं, बल्कि देशव्यापी वोटिंग से होना चाहिए। बतौर ट्रंप एक सोशल मीडिया सर्वे (पोल) में ज्यादातर लोगों ने यह राय दी कि जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता को सीमित करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अदालतों और कानूनी संस्थाओं पर भरोसा नहीं है कि वे इस मुद्दे पर सही फैसला लें।
ट्रम्प ने चिट्ठी में कैलिफोर्निया के टेक सेक्टर का जिक्र करते हुए कहा कि हाई-टेक नौकरियों में भारत और चीन के लोगों का बहुत ज्यादा असर है। उसके मुताबिक, वहां की कंपनियों में भर्ती का माहौल ऐसा बन गया है कि बाकी लोगों के लिए मौके बहुत कम रह गए हैं। बकौल ट्रंप इन जगहों पर नौकरी पाने के लिए योग्यता से ज्यादा यह मायने रखता है कि आप किस देश से हैं, और उसके अनुसार सिस्टम इस तरह काम कर रहा है कि भारतीय और चीनी लोगों को प्राथमिकता मिलती है। यानी उसके हिसाब से भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है, बल्कि कुछ खास समूहों के पक्ष में झुकी हुई है।
ट्रंप की चिट्ठी में लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाली अमेरिकन सिविल लिबर्टी यूनियन पर भी निशाना साधा गया। इसमें कहा गया है कि यह संगठन अवैध प्रवासियों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियों का समर्थन करता है। ट्रम्प ने कहा कि इस संगठन पर संगठित अपराध जैसे कड़े कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। ट्रम्प ने यह भी आरोप लगाया कि प्रवासी स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सरकारी सुविधाओं का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिसका खर्च करदाताओं पर पड़ता है।