अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग का आज आठवां दिन है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ऐलान किया है कि आज रात ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला होगा। उन्होंने कहा कि इस हमले का मकसद ईरान के मिसाइल लॉन्चर और मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को तबाह करना है। अमेरिकी हमलों ने ईरान की क्षमता को 90 फीसदी तक घटा दिया है।
इससे पहले इजरायल ने तेहरान के मोहराबाद एयरपोर्ट पर हवाई हमला किया। धमाके से पूरा इलाका दहल उठा। वहीं, जानकारी सामने आ रही है कि इस जंग में रूस ईरान की खुफिया मदद कर रहा है। वह ईरान को मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों और सैन्य विमानों की लोकेशन से जुड़ी जानकारी दे रहा है। इस जानकारी की मदद से ही ईरान की IRGC अमेरिकी सैन्य ठिकानों व दूतावासों को निशाना बना रहे हैं।
इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि अब पड़ोसी देशों पर हमले नहीं किए जाएंगे, जब तक कि उन देशों की जमीन से ईरान पर कोई हमला न किया जाए। ईरानी मीडिया के अनुसार राष्ट्रपति ने बताया कि ईरान की अंतरिम नेतृत्व परिषद ने कल इस फैसले को मंजूरी दी है। पेजेशकियन ने पिछले कुछ दिनों में पड़ोसी देशों पर हुए हमलों के लिए उनसे माफी भी मांगी। उन्होंने कहा कि ईरान इन देशों के साथ तनाव बढ़ाना नहीं चाहता और भविष्य में ऐसे हमलों से बचने की कोशिश करेगा।
28 फरवरी को जंग की शुरुआत से अब तक ईरान इजराइल समेत मिडिल ईस्ट के 13 देशों को निशाना बना चुका है। वहीं, अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने शनिवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा है कि आज रात ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस हमले का मकसद ईरान के मिसाइल लॉन्चर और मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को भारी नुकसान पहुंचाना है।
ईरान का एक युद्धपोत IRIS लावन भारत के कोच्चि बंदरगाह पर रुका हुआ है। ANI ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान ने 28 फरवरी को तकनीकी खराबी आने के बाद भारत से मदद मांगी थी। भारत ने 1 मार्च को जहाज को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति दी और इसके बाद 4 मार्च को यह बंदरगाह पर पहुंच गया। जहाज के 183 क्रू मेंबर फिलहाल कोच्चि में भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहरे हुए हैं। IRIS लावन हाल ही में भारत में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) 2026 और मिलान 2026 नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ था, जो 15 से 25 फरवरी के बीच आयोजित हुए थे।