नई दिल्ली। परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर संसद में घमासान जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सदन में कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष को निशाने पर लेते हुए कहा कि इसे राजनीति के तराजू में मत तौलिए।
पीएम मोदी ने लोकसभा को संबोधित करते हुए कहा, 'आज जिम्मेदारी के साथ सदन में कहना चाहता हूं कि चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूर्व हो, पश्चिम हो, छोटे राज्य हों या बड़े, मैं जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करेगी। यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी। भूतकाल में जो सरकारें रही और जिनके कालखंड में जो परिसीमन हुआ और जो अनुपात चला आ रहा है, उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा और वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी।'
पीएम मोदी ने कहा, 'इसको राजनीति के तराजू से मत तौलिए। ये राज्यहित का फैसला है। एक साथ बैठकर एक दिशा में सोचकर विकसित भारत बनाने में हमारी नारी शक्ति की भागदारी को एक खुले मन से निर्णय करने का अवसर है, स्वीकार करने का अवसर है। आज पूरा देश विशेषकर नारी शक्ति हमारे निर्णय तो देखेंगी लेकिन निर्णय से ज्यादा हमारी नीयत को देखेंगी। इसलिए हमारी नीयत की खोट देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेंगी। 2023 में इस नए सदन का हमने सर्वसम्मति से इस विधेयक को स्वीकार किया था।'
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, '2029 में हमारे पास अवसर है, अगर हम 29 में भी नहीं करते हैं तो स्थिति क्या बनेगी? हम कल्पना कर सकते हैं। हम देश की माताओं-बहनों में यह विश्वास नहीं बना पाएंगे कि हम सचमुच में प्रयास करते हैं। हम ज्यादा विलंब न करें, इस दौरान राजनीतिक दल के लोगों से संविधान के जानकार लोगों से चर्चाएं की। एक बात जरूर कहना चाहता हूं। सदन में पवित्र जगह से कहना चाहता हूं दक्षिण, पश्चिम, पूरब, उत्तर दक्षिण राज्य हो। ये निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी अन्याय नहीं करेगी।'
पीएम मोदी ने आगे कहा कि भूतकाल में जो सरकार रहीं, जो उस समय से अनुपात चला आ रहा है उसमें भी बदलाव नहीं होगा। पीएम मोदी ने कहा कि अगर गांरटी शब्द चाहिए तो मैं वह शब्द भी उपयोग करता हूं, वादा की बात करते हो तो उसे भी इस्तेमाल करता हूं। तमिल में कोई शब्द हो तो मैं उसे भी कहता हूं, क्योंकि जब नीयत साफ है तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है।