नई दिल्ली। चंबल नदी में हो रहे अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि संरक्षित राष्ट्रीय घड़ियाल सैंचुरी में जारी अवैध खनन को तुरंत नहीं रोका गया तो हालात संभालने के लिए अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी।

दो जजों की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि चंबल नदी के संवेदनशील इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन जारी है। यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि पर्यावरण और जलीय जीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। कोर्ट ने विशेष रूप से घड़ियाल, डॉल्फिन और दुर्लभ कछुओं जैसे जीवों पर पड़ रहे दुष्प्रभाव पर चिंता जताई है।

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कोर्ट ने तीनों राज्यों को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि जिन घाटों और रास्तों से रेत का अवैध खनन और परिवहन हो रहा है वहां हाई रिजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। साथ ही खनन में इस्तेमाल हो रहे सभी वाहनों और मशीनों की निगरानी के लिए उनमें अनिवार्य रूप से जीपीएस डिवाइस लगाने के निर्देश दिए गए हैं। 

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने वन विभाग और पुलिस को संयुक्त रूप से 24 घंटे गश्त करने का आदेश दिए हैं। साथ ही अवैध खनन में शामिल वाहनों को जब्त कर सख्त कार्रवाई करने और दोषियों के खिलाफ प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने को कहा गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी और जवाबदेही तय की जाएगी।

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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पॉल्यूटर पे प्रिंसिपल लागू करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके तहत अवैध खनन करने वालों से पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई वसूली जाएगी ताकि नदी और बायोडयवर्सिटी को हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। दरअसल, यह मामला बीते 8 अप्रैल को वनरक्षक हरिकेश गुर्जर की अवैध रेत से भरे ट्रैक्टर ट्रॉली से कुचलकर हत्या के बाद और गंभीर हो गया था। उस घटना के बाद कोर्ट ने मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था। इससे पहले 13 अप्रैल की सुनवाई में भी कोर्ट ने चंबल के मुख्य पुल के आसपास जड़ों तक हो रहे खनन पर नाराजगी जताई थी।

कोर्ट की सख्ती का असर अब जमीन पर भी दिखने लगा है। मुरैना में अर्धसैनिक बल एसएएफ के 94 जवान तैनात किए गए हैं जो 14 अप्रैल से चंबल के राजघाट समेत प्रमुख रास्तों पर 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा सबलगढ़ और अंबाह क्षेत्रों में भी अतिरिक्त बल तैनात किया गया है जो स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई कर रहा है। हाईटेक निगरानी के तहत ड्रोन और मोटरबोट के जरिए नदी के घाटों पर लगातार सर्चिंग की जा रही है। वहीं, कई स्थानों पर हाई रिजोल्यूशन कैमरे भी लगाए जा रहे हैं। वन, पुलिस और राजस्व विभाग ने इन कदमों की जानकारी कोर्ट में प्रस्तुत की है।

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