शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से सिंधिया रियासत के दौर की करीब 400 वर्ष पुरानी एक दुर्लभ तोप चोरी होने का मामला सामने आया है। लगभग 3500 किलोग्राम वजनी इस तोप को बदमाश 15 जुलाई की रात ओपन कचहरी परिसर से उठाकर ले गए। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि वारदात को पूरी योजना के साथ अंजाम दिया गया और इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय एंटीक ब्लैक मार्केट से जुड़े गिरोह का हाथ हो सकता है। जानकारों के मुताबिक, काले बाजार में इस तोप की कीमत 3 से 5 करोड़ रुपए तक हो सकती है।

जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने भारी भरकम तोप को सुरक्षित तरीके से ले जाने के लिए पहले उसे गद्दों में लपेटा। इसके बाद बैरिंग लगी लोहे की ट्रॉली की मदद से उसे करीब 3000 फीट नीचे उतारा गया और फिर लोडिंग वाहन में रखकर मौके से फरार हो गए। घटनास्थल के आसपास भारी वाहनों के टायरों के निशान भी मिले हैं। जिससे पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।

पुलिस और पुरातत्व विभाग की जांच में यह भी पता चला है कि चोर पहले भी इस तोप को चुराने की कोशिश कर चुके थे। 4-5 जुलाई की रात बदमाशों ने तोप को उसके मूल स्थान से नीचे गिरा दिया था लेकिन अत्यधिक वजन होने के कारण वे उसे वहां से नहीं ले जा सके। उस समय सुरक्षा गार्डों ने नरवर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद आरोपी पूरी तैयारी के साथ दोबारा लौटे और इस बार चोरी की वारदात को अंजाम देने में सफल रहे।

चोरी के बाद नरवर किले की ओपन कचहरी में रखी ऐतिहासिक तोपों की संख्या 14 से घटकर 13 रह गई है। यह सभी तोपें सिंधिया राजवंश काल की धरोहर मानी जाती हैं। कचहरी महल का निर्माण 16वीं शताब्दी में कछवाह शासकों ने कराया था, जबकि वर्ष 1925 में महाराजा माधवराव सिंधिया के निर्देश पर इसका जीर्णोद्धार कराया गया था। यहां रखी गई तोपें पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु जैसी मिश्रित धातुओं से बनी हैं तथा इन पर फारसी और देवनागरी लिपि में शिलालेख भी अंकित हैं।

घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान पुलिस और राज्य पुरातत्व विभाग की संयुक्त टीम को कई अहम साक्ष्य मिले हैं। मौके से गद्दे, रजाई, लोहे के पाइप और तोप को घसीटकर ले जाने के स्पष्ट निशान बरामद हुए हैं। साथ ही किले के पिछले दुर्गम रास्ते पर वाहन के टायरों के निशान भी मिले हैं, जिनके आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

मामले में सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सुरक्षा गार्ड बालकिशन बाल्मीक ने स्वीकार किया कि किले पर रात में रुकने की कोई व्यवस्था नहीं है। वहां टॉर्च सहित जरूरी सुरक्षा संसाधनों का अभाव है। जिसके कारण वह रात में अपने घर चला गया था। दूसरे गार्ड शरणलाल जाटव ने भी माना कि घटना के समय वह ड्यूटी पर मौजूद नहीं था। उसने यह भी स्वीकार किया कि हथियारबंद बदमाशों द्वारा लूट की जो कहानी पुलिस को बताई गई थी। वह सही नहीं थी।

जानकारी के अनुसार, नरवर किले की सुरक्षा के लिए कुल छह गार्ड तैनात हैं। जिनमें चार दिन और दो रात की ड्यूटी संभालते हैं। घटना वाली रात दोनों रात्रिकालीन गार्ड अपनी ड्यूटी छोड़कर घर चले गए थे। जिसका फायदा उठाकर चोर ऐतिहासिक तोप चोरी करने में सफल रहे।

राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने बताया कि जांच में ऐतिहासिक तोप चोरी होने के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं और पुलिस के साथ संयुक्त रूप से पूरे मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत गंभीर घटना है और किले की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जाएगी। वहीं, नरवर थाना प्रभारी विनय यादव ने बताया कि सुरक्षा गार्डों की लापरवाही जांच में सामने आई है। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर चोरी में इस्तेमाल वाहन तथा आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।