प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जींद और सोनीपत के बीच शुरू हुई इस सेवा के साथ भारत हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन संचालित करने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया है। प्रधानमंत्री ने इसे दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेन बताते हुए कहा कि इसका डिजाइन भारतीय इंजीनियरों ने तैयार किया है और इसका निर्माण भी देश में ही किया गया है। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एलिवेटेड रेलवे ट्रैक, दो मेडिकल कॉलेज समेत आठ विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया।

नमो ग्रीनरेल नाम की यह 10 कोच वाली ट्रेन 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत मार्ग पर 14 स्टेशनों के बीच चलेगी। ट्रेन की परिचालन गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। जबकि, इसे अधिकतम 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है। यह सफर करीब दो घंटे में पूरा करेगी और यात्रियों के लिए किराया 5 रुपये से 25 रुपये के बीच निर्धारित किया गया है। एक बार में इस ट्रेन में लगभग 2,600 यात्री सफर कर सकेंगे।

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यह ट्रेन पूरी तरह ग्रीन एनर्जी आधारित तकनीक पर काम करती है और इसे चलाने के लिए न डीजल की जरूरत होती है और न ही पारंपरिक 25 केवी ओवरहेड बिजली लाइन की। इसमें अत्याधुनिक हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है जो लगभग 1200 किलोवाट क्षमता के फ्यूल सेल और करीब 3200 हॉर्स पावर वाले इंजन के जरिए ट्रेन को शक्ति प्रदान करता है। इंजन में लगे हाइड्रोजन सिलेंडरों में ईंधन रहता है। जबकि, उत्पन्न बिजली को बैटरी स्टैक में सुरक्षित किया जाता है। ट्रेन के संचालन के लिए ड्राइवर केबिन में आधुनिक PAPIS डिस्प्ले सिस्टम भी लगाया गया है।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ऊर्जा उत्पादन के दौरान वातावरण में केवल भाप निकलती है। यह बाद में पानी में बदल जाती है। इसी वजह से इसे पूरी तरह प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण अनुकूल ट्रेन माना जा रहा है। ट्रेन में ईंधन भरने के लिए जींद रेलवे स्टेशन पर विशेष हाइड्रोजन उत्पादन, स्टोरेज और डिस्पेंसिंग सिस्टम भी स्थापित किया गया है।

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इस परियोजना को भारतीय रेलवे के लिए एक बड़े तकनीकी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहता है तो भविष्य में कालका-शिमला, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, नीलगिरी माउंटेन रेलवे और मध्य प्रदेश के पातालपानी जैसे हेरिटेज रेल मार्गों पर डीजल या कोयले से चलने वाली ट्रेनों की जगह हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जा सकती हैं।

हाइड्रोजन रेल तकनीक के क्षेत्र में भारत अब उन चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो गया है जहां इस तकनीक का संचालन या परीक्षण किया जा रहा है। इससे पहले जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन में हाइड्रोजन ट्रेनें संचालित हो रही हैं। भारतीय रेलवे का मानना है कि यह पहल न केवल कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में बड़ा कदम है बल्कि भविष्य की टिकाऊ और स्वदेशी रेल परिवहन व्यवस्था की मजबूत नींव भी साबित होगी।

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