मध्यप्रदेश की बिजली कंपनियों में काम कर रहे साढ़े चार हजार से अधिक संविदा अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमित पदों पर नियुक्त करने की प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ पा रही है। ऊर्जा विभाग ने जुलाई में नई नियुक्ति योजना जारी कर दी थी लेकिन ऑनलाइन परीक्षा का नोटिफिकेशन अब तक जारी नहीं हुआ है। इससे नाराज संविदा कर्मचारियों ने 5 अक्टूबर तक परीक्षा की अधिसूचना जारी नहीं होने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
यूनाइटेड फोरम फॉर पॉवर एम्प्लाइज एसोसिएशन के मुताबिक, आंदोलन के पहले चरण में एक दिन का धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई तो दिवाली से पहले सात दिन का नोटिस देकर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार किया जाएगा। फोरम ने चेताया है कि लंबे समय तक कार्य बहिष्कार की स्थिति में बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
फोरम के प्रांताध्यक्ष इंजीनियर आरएस कुशवाह ने कहा कि परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी करने को लेकर ऊर्जा विभाग को पत्र के माध्यम से पहले ही चेताया जा चुका है। कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर फोरम ने सोशल मीडिया पर विशेष ट्विटर अभियान भी शुरू किया है।
ऊर्जा विभाग ने 24 जुलाई को संविदा आधार पर कार्यरत कार्मिकों की समकक्ष नियमित पदों पर नवीन नियुक्ति योजना 2026 जारी की थी। इसके तहत पात्र संविदा कर्मचारियों को उपलब्ध नियमित रिक्त पदों पर नई नियुक्ति देने का प्रावधान किया गया है।
इस योजना में एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी और मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के पात्र संविदा कर्मचारी शामिल होंगे। लाइन अटेंडेंट, टेस्टिंग अटेंडेंट, जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर समेत विभिन्न समकक्ष नियमित पदों पर नियुक्ति की जानी है।
योजना को लागू करने की जिम्मेदारी संबंधित बिजली कंपनियों के प्रबंध संचालकों को दी गई है। हालांकि, मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी को योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।
नियमित नियुक्ति के लिए पात्र कर्मचारियों की ऑनलाइन परीक्षा कराई जाएगी। नियुक्ति उन्हीं पदों पर संभव होगी जिनके समकक्ष नियमित रिक्त पद उपलब्ध हैं। चयन के लिए केवल परीक्षा के अंक ही आधार नहीं होंगे। परीक्षा में मिले अंकों के साथ संविदा सेवा की अवधि के आधार पर मिलने वाले बोनस अंकों को जोड़कर श्रेणीवार मेरिट सूची तैयार की जाएगी।
नियुक्तियों में मध्यप्रदेश शासन के आरक्षण नियम लागू होंगे। वहीं, पात्र संविदा कर्मचारियों को आवेदन के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा में भी छूट का प्रावधान किया गया है।
योजना का लाभ लेने के लिए कर्मचारी को स्वीकृति की तारीख तक संबंधित उत्तरवर्ती बिजली कंपनी में कम से कम दो वर्ष की संविदा सेवा पूरी करना जरूरी है। यदि दो संविदा अनुबंधों के बीच अंतर रहा है तो उसे सेवा में व्यवधान नहीं माना जाएगा लेकिन उस अंतराल की अवधि को अनुभव में शामिल नहीं किया जाएगा।
किसी कर्मचारी की दोबारा संविदा नियुक्ति हुई है तो सेवा से बाहर रहने की अवधि घटाने के बाद ही उसका कुल अनुभव निर्धारित किया जाएगा। अनुभव प्रमाण पत्र कार्यपालन अभियंता या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी द्वारा जारी किया जाना होगा।
योजना के तहत नियमित पद पर चयनित होने वाले कर्मचारी को पहले अपने मौजूदा संविदा पद से इस्तीफा देना होगा। इस्तीफा स्वीकार करने के लिए लागू एक महीने की नोटिस अवधि में छूट का प्रावधान किया गया है।
इस्तीफा स्वीकार होने के बाद उसकी संविदा सेवा समाप्त मानी जाएगी। इसके बाद कर्मचारी पुरानी संविदा सेवा के आधार पर वरिष्ठता, पदोन्नति या किसी अन्य सेवा लाभ का दावा नहीं कर सकेगा।
फिलहाल कर्मचारियों की निगाह परीक्षा के नोटिफिकेशन पर है। फोरम ने 5 अक्टूबर की समयसीमा तय करते हुए स्पष्ट किया है कि इसके बाद मांग पूरी नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।