भोपाल। राजधानी भोपाल के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित मानस भवन के पास शनिवार सुबह जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आदिवासी बस्ती को हटाया। शुक्रवार रात से ही पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया था और सुबह बैरिकेडिंग कर आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई थी। सुबह करीब 7 बजे शुरू हुई यह कार्रवाई दोपहर लगभग 3 बजे तक चली। प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस के कई नेता मौके पर पहुंचे और धरने पर बैठ गए।
प्रशासन की टीम ने सुनियोजित तरीके से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को अंजाम दिया। उस दौरान वहां कुल 95 अधिकारी और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। यह बस्ती करीब 70 साल पुरानी बताई जा रही है। प्रशासन के अनुसार, यहां रहने वाले 27 परिवारों को हटाकर भौंरी, कलखेड़ा और मालीखेड़ी क्षेत्रों में पुनर्वासित किया जाएगा।
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इस कार्रवाई के दौरान राजनीतिक विरोध भी देखने को मिला। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी और आसिफ जकी सहित कई कांग्रेस नेता मौके पर पहुंचे थे। सभी कांग्रेस नेता ने मौके पर कार्रवाई का विरोध करते हुए धरने पर बैठ गए। इस दौरान कार्रवाई के विरोध में एक युवक टावर पर चढ़ गया था। हालांकि, पुलिस ने समझाइश देकर उसे सुरक्षित नीचे उतार लिया।
स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। इसके बाद भी प्रदर्शन जारी रहने पर पुलिस ने शबिस्ता जकी और आसिफ जकी समेत कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया। हालांकि, उन नेताओं को बाद में छोड़ दिया गया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूर्व निर्धारित योजना के तहत की गई है और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है।
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मामले पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अपने आधिकारीक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट कर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “भोपाल के मानस भवन क्षेत्र में पिछले 70 सालों से रह रहे 27 आदिवासी परिवारों को हटाया जा रहा है। चारों तरफ बैरिकेडिंग, भारी पुलिस बल। सिस्टम गरीबों की बस्ती पर सख्त नजर आ रहा है। माननीय हाईकोर्ट के आदेश का हम सम्मान करते हैं लेकिन सरकार का कर्तव्य केवल हटाना नहीं, सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित करना भी है।”
उन्होंने पोस्ट में लोगों के पुनर्वास को लेकर भी सरकार पर सवाल दागा है। उन्होंने लिखा, ” इन परिवारों को शहर से दूर भौंरी, कलखेड़ा, मालीखेड़ी भेजा जा रहा है। क्या उनके रोजगार, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और जीवन-यापन की ठोस व्यवस्था की गई है? जो परिवार दशकों से शहर का हिस्सा रहे, उन्हें अचानक उजाड़ देना प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, सामाजिक अन्याय बन जाता है। सरकार स्पष्ट करे पुनर्वास के साथ रोजगार की गारंटी, मूलभूत सुविधाएं और जीवन की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?”
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