भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, राजनीतिक समीकरण और ज्यादा दिलचस्प होता जा रहा है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के बाद अब दतिया विधायक राजेंद्र भारती कोर्ट के मसले में उलझ गए हैं। उन्हें 25 साल पुराने एक मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई है। राज्यसभा में वे वोट कर पाएंगे या नहीं इसे लेकर फिलहाल असमंजस की स्थिति है। इसी बीच कांग्रेस ने सत्ताधारी पर विधायकों के खरीद-फरोख्त में लगे होने के आरोप लगाए हैं।
मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया है कि बीजेपी हमारे विधायकों को खरीदने की कोशिश कर रही है। सिंघार ने कहा कि सत्ता के लिए भाजपा लोकतंत्र पर लगातार हमले कर रही है। नेता विपक्ष ने गुरुवार को एक एक्स पोस्ट में लिखा कि मध्य प्रदेश में मई में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा की मंशा अब खुलकर सामने आ रही है। चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस विधायकों को तोड़ने और खरीदने की कोशिश की जा रही है और जब यह प्रयास सफल नहीं हो रहा, तो उनके खिलाफ पुराने मामलों को हथियार बनाया जा रहा है।
उमंग सिंघार ने कहा कि दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 25 साल पुराने मामले में सजा सुनाकर दिल्ली में गिरफ्तारी, जबकि पूर्व भाजपा विधायक नरोत्तम मिश्रा का पेड न्यूज मामला वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, यह दोहरे मापदंड साफ दिखाता है। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि विजयपुर (श्योपुर) से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता समाप्त कर उन्हें राज्यसभा चुनाव में मतदान से वंचित कर दिया गया।
सिंघार ने यह भी आरोप लगाया कि सेमरिया विधायक अभय मिश्रा और भोपाल मध्य विधायक आरिफ मसूद के पुराने मामलों को अचानक सक्रिय किया जाना भाजपा की सत्ता के लिए भूख साफ़ दिखाता है। उन्होंने कहा कि यह घटनाएं स्पष्ट संकेत देती हैं कि जो विधायक भाजपा के दबाव में नहीं आ रहे, उन्हें ज़बरन पुराने या झूठी कार्यवाही के जरिए चुनाव प्रक्रिया से बाहर करने की साजिश रची जा रही है।
सिंघार ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग का खुला उदाहरण है।विधायकों को डराकर, सजा दिलाकर और सदस्यता छीनकर चुनाव जीतने की कोशिश यह साबित करती है कि भाजपा जनता के विश्वास से नहीं, बल्कि दबाव और साजिश से सत्ता बनाए रखना चाहती है। इतिहास गवाह है कि ऐसे हथकंडे लंबे समय तक नहीं चलते। जनता सब देख रही है, और समय आने पर जवाब भी देगी।
बता दें कि विधानसभा की 230 सीटों वाले मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाली जंग साख की लड़ाई बन गई है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से अयोग्यता के मामले में राहत तो मिली, लेकिन मतदान से उन्हें वंचित रखा गया है। कांग्रेस इस झटके से उभरती उससे पहले दतिया विधायक को तीन साल की सजा सुनाई गई। ऐसे में उनकी विधानसभा की सदस्यता पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस अपनी इकलौती सुरक्षित मानी जाने वाली सीट बचा पाएगी?
मध्य प्रदेश विधानसभा में एक राज्यसभा सीट के लिए 58 वोटों की दरकार है। बीजेपी के पास 160 से ज्यादा विधायक हैं, जिससे उसकी दो सीटें पूरी तरह पक्की हैं। असली पेंच तीसरी सीट पर फंसा है। कांग्रेस के पास आधिकारिक तौर पर 65 विधायक थे, लेकिन यह संख्या प्रभावी रूप से 62 रह गई है। बीना से विधायक निर्मला सप्रे पर दलबदल की तलवार लटकी है, तो मुकेश मल्होत्रा वोट नहीं डाल पाएंगे। वहीं, राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा हुई है। बीजेपी अगर पांच से छः विधायकों को तोड़ने में सफल होती है तो कांग्रेस की हाथ से यह सीट फिसल जाएगी।