भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर महाकौशल क्षेत्र के सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिलों में स्थित पेंच टाइगर रिजर्व के ईको सेंसिटिव जोन (ESZ) में शामिल 108 आदिवासी बाहुल्य ग्रामों में व्याप्त आशंकाओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है।
उन्होंने कहा है कि वर्ष 2019 में भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के तहत इंदिरा प्रियदर्शनी पेंच राष्ट्रीय उद्यान एवं पेंच मोगली अभ्यारण को सम्मिलित करते हुए गठित पेंच टाइगर रिजर्व के चारों ओर 771 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ईको सेंसिटिव जोन घोषित किया गया था। अधिसूचना के अनुसार कोर एवं बफर जोन से लगे 2 किलोमीटर क्षेत्र को शामिल करते हुए “आंचलिक महायोजना” तैयार किए जाने के निर्देश दिए गए थे, जिसमें पंचायतराज संस्थाओं सहित 11 विभागों से परामर्श अनिवार्य किया गया था।
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 285 पृष्ठों के विस्तृत मास्टर प्लान को ग्राम सभाओं में विधिवत प्रस्तुत नहीं किया गया। आरोप है कि मात्र 24 घंटे की सूचना पर ग्राम सभाएँ आयोजित कर औपचारिकता निभाई गई। ग्राम पंचायतों को केवल 4 पृष्ठों की संक्षिप्त जानकारी उपलब्ध कराई गई, जबकि संपूर्ण दस्तावेज अंग्रेजी भाषा में है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को वास्तविक जानकारी नहीं मिल सकी।
उन्होंने कहा कि सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले के अधिकांश भाग संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आते हैं तथा यहां पेसा एक्ट लागू है। ऐसे में जल, जंगल और जमीन से जुड़े मामलों में ग्राम सभाओं की सहमति और सक्रिय सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। कुरई जनपद पंचायत (जिला सिवनी) के 55 ग्राम पेसा एक्ट के दायरे में हैं, जो सीधे तौर पर ईको सेंसिटिव जोन से प्रभावित हो रहे हैं।
सिंह ने बताया कि इस विषय में केवलारी विधानसभा क्षेत्र के विधायक रजनीश सिंह, कांग्रेस जिला अध्यक्ष नरेश मरावी, कांग्रेस वन प्रकोष्ठ के अध्यक्ष आशिक इकबाल खान सहित अनेक जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों द्वारा हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन प्रस्तुत किया गया है। सरपंच संघ, जनपद पंचायत कुरई (जिला सिवनी) ने भी कलेक्टर को पत्र लिखकर मांग की है कि मास्टर प्लान का हिंदी अनुवाद तैयार किया जाए। संपूर्ण 285 पृष्ठों की प्रति ग्राम सभाओं में रखी जाए। कम से कम 30 दिवस का समय देकर आपत्तियां एवं सुझाव आमंत्रित किए जाएं। पूरी प्रक्रिया पंचायतराज अधिनियम एवं पेसा एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप पारदर्शी ढंग से संपन्न हो।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रभावित 108 ग्रामों में 90 प्रतिशत से अधिक परिवार अनुसूचित जनजाति समुदाय के हैं, जिनकी आजीविका वन एवं प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित है। ईको सेंसिटिव जोन के अंतर्गत प्रस्तावित “आंचलिक महायोजना” के साथ “पर्यटन महायोजना” भी तैयार की जानी है। उन्होंने सुझाव दिया कि पर्यटन आधारित गतिविधियों, जैसे होम स्टे, छोटे होटल, रिसॉर्ट, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प एवं वन उत्पाद आधारित उद्यम में आदिवासी परिवारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें स्थायी रोजगार मिल सके।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आशंका व्यक्त की कि यदि पारदर्शिता और सहभागिता सुनिश्चित नहीं की गई तो आदिवासी परिवारों की आजीविका पर संकट उत्पन्न हो सकता है तथा उन्हें अनावश्यक प्रतिबंधों और विस्थापन जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने विश्वास जताया है कि राज्य सरकार आदिवासी समुदाय के अधिकारों एवं हितों की रक्षा करते हुए न्यायसंगत एवं सहभागी विकास मॉडल अपनाएगी।