राजस्थान के झुंझुनूं जिले में सोमवार सुबह सड़क निर्माण के दौरान बड़ा हादसा हो गया। उदयपुरवाटी के छापोली गांव में रोड़ी और बजरी मिलाने वाली मशीन हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गई। मशीन में करंट फैलने से वहां काम कर रहे 8 मजदूरों की मौत हो गई। जबकि, 5 अन्य झुलस गए। हादसा सुबह करीब 10 बजे छापोली-कदंब कुंड मार्ग पर हुआ। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने धरना शुरू कर दिया।
उदयपुरवाटी थाना प्रभारी रामपाल के मुताबिक, हादसे वाली जगह सीकर-नीमकाथाना स्टेट हाईवे से करीब 150 मीटर अंदर है। सड़क निर्माण के लिए इस्तेमाल की जा रही कंक्रीट मिक्सर मशीन का हाइड्रोलिक जैक ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन के तार से छू गया। इसके बाद मशीन में करंट उतर आया और उसके संपर्क में आए मजदूर इसकी चपेट में आ गए।
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हादसे के बाद मौके पर पहुंचे मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने सड़क निर्माण की अनुमति और जमीन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह सड़क किसी सरकारी योजना के तहत नहीं बनाई जा रही थी। उनके मुताबिक, वन विभाग की जमीन पर ग्रामीण अपने स्तर पर सड़क का निर्माण करा रहे थे। मंत्री ने कहा कि यदि यह रास्ता सार्वजनिक उपयोग का था तो पंचायत या व्यक्तिगत स्तर पर सड़क के लिए प्रस्ताव भेजकर जमीन के डायवर्जन की प्रक्रिया पूरी की जा सकती थी। नियमों के तहत प्रस्ताव आने पर सरकार के स्तर से भी रास्ता बनवाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हादसे को लेकर पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि मृतक बेहद गरीब परिवारों से थे और सरकार को प्रत्येक परिवार को 20 से 25 लाख रुपये का मुआवजा देना चाहिए। गुढ़ा के मुताबिक, उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री से भी बात की है। घटनास्थल पर मंत्री झाबर सिंह खर्रा के साथ कलेक्टर और एसपी भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि संबंधित इलाके में पहले भी हादसे होते रहे हैं और हर साल 7 से 8 लोगों की जान जाने की बात सामने आती रही है।
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हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए धरना शुरू कर दिया। ग्रामीण अविनाश ने आरोप लगाया कि गांव के लोग आपस में पैसे इकट्ठा करके सड़क बनवा रहे थे लेकिन सरकारी अधिकारियों और नेताओं ने पहले दो बार निर्माण कार्य बंद करवा दिया था। उनका कहना है कि काफी मिन्नतों के बाद दोबारा काम शुरू कराया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव के विकास से जुड़े कामों में लगातार बाधाएं खड़ी की जाती रही हैं। इसी नाराजगी के चलते हादसे के बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। फिलहाल हादसे के कारणों और सड़क निर्माण से जुड़े नियमों की जांच की जा रही है। वहीं, ग्रामीण मृतकों के परिवारों के लिए उचित मुआवजे और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।