मध्य प्रदेश में संक्रामक बीमारी खसरा के नए मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। फरवरी 2024 के बाद अब साल 2026 में प्रदेश के चार जिलों में खसरे के कुल 12 मामलों की पुष्टि हुई है। इनमें अलीराजपुर, दतिया, शिवपुरी और बुरहानपुर जिले शामिल हैं। प्रभावित क्षेत्रों में बुखार, शरीर पर लाल दाने और खांसी जैसे लक्षणों वाले मरीज मिलने के बाद सैंपल जांच कराई गई जिसमें संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में सतर्कता बढ़ाते हुए अलर्ट जारी कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा कर मरीजों के सैंपल एकत्र किए थे। जांच रिपोर्ट में कई मरीजों में खसरे के संक्रमण की पुष्टि हुई है। बुरहानपुर जिले के बरौली गांव में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर पाई गई है। यहां जांच के लिए भेजे गए पांचों सैंपल पॉजिटिव निकले हैं। यहां संक्रमित मरीजों की उम्र 2 से 25 साल के बीच बताई गई है। वहीं, दतिया जिले के आगोरा गांव में भी संक्रमण के 3 मामले सामने आए हैं। यहां 8 संदिग्ध मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें से 3 पॉजिटिव पाए गए हैं। इस क्षेत्र में संक्रमित लोगों की उम्र 0 से 40 साल तक बताई जा रही है।
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इसी तरह शिवपुरी जिले के खनियाधाना क्षेत्र के गुदर गांव में पांच संदिग्ध मरीजों की जांच कराई गई थी। जिनमें से तीन में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इन मरीजों की उम्र 4 से 15 साल के बीच है। वहीं, अलीराजपुर जिले के जोबट क्षेत्र के कांडा-चुलिया गांव में छह सैंपल में से एक मरीज खसरे से संक्रमित पाया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, खसरे के दोबारा सामने आने के पीछे टीकाकरण में आई बाधाएं एक बड़ा कारण मानी जा रही हैं। खासतौर पर विमुक्त और घुमक्कड़ समुदायों के लगातार स्थान बदलते रहने से बच्चों का नियमित टीकाकरण पूरा नहीं हो पाता। इसके अलावा कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने से कई बच्चों को खसरे के टीके की अनिवार्य खुराक समय पर नहीं मिल सकी।
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विशेषज्ञों का कहना है कि खसरा बच्चों के लिए बेहद खतरनाक बीमारी हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, यह संक्रमण केवल श्वसन तंत्र को ही प्रभावित नहीं करता बल्कि बच्चों में अंधेपन का भी एक प्रमुख कारण बन सकता है। दुनिया भर में हर साल लगभग 60 हजार बच्चे खसरे के कारण अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं। नए मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है और टीकाकरण अभियान को तेज करने की तैयारी की जा रही है।