भोपाल। मध्य प्रदेश में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीदी में हो रही देरी को लेकर विपक्ष हमलावर है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आरोप लगाया है कि सरकार की नीयत अन्नदाता का भला करने की नहीं है, केवल नाटक-नौटंकी प्रोपगंडा करने की है।

कमलनाथ ने कृषक कल्याण वर्ष के आयोजन पर भी सवाल खड़े किए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, 'मध्य प्रदेश कि भाजपा सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया। पिछली सरकार ने अन्नदाता मिशन घोषित किया था। सरकार केवल घोषणा करती है...किसानों के लिए काम कुछ नहीं करती है। मध्यप्रदेश में किसान की स्थिति जस की तस है।

कमलनाथ ने आगे कहा सरकार आज तक गेहूं की खरीद शुरू नहीं कर पाई, किसान गेहूं को लगातार MSP के नीचे बेचने को मजबूर हैं। किसान की कर्ज माफी सरकार आज तक नहीं कर पाई, जबकि सरकार बने तीसरा साल हो गया। पहले भी 15 साल से सरकार थी। सरकार आज तक MSP की गारंटी नहीं दे पाई। आज भी किसान मुख्य फसलें जैसे मक्का, मूंग आदि सस्ते में बेचने को मजबूर रहा।

कमलनाथ ने कहा कि प्याज, लहसुन, टमाटर, आदि, जैसी फसलों के बाजार भाव पिछले साल की तुलना में आधे रहे, पर सरकार मौन बैठी रही। किसानों को कोई समर्थन नहीं दिया। किसानों की आय दुगनी करने का दावा करती आ रही सरकार आज तक किसानों की आय दुगनी नहीं कर पाई। इस सरकार की नीयत अन्नदाता का भला करने की नहीं है, केवल नाटक-नौटंकी प्रोपगंडा करने की है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने पूछा कि सरकार यह बताए कि क्या कृषक कल्याण वर्ष में कृषि विभाग का बजट सरकार ने पिछले साल से 2-3 गुना किया है क्या? यदि नहीं किया है, तो क्या मंचीय कार्यक्रम और भाषणबाजी से किसान का भला होगा क्या? उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष का कड़वा सच यही है। मध्य प्रदेश का किसान इस कड़वे सच को देख रहा है, और करारा जवाब देगा।