चेन्नई। देश में महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर बहस छिड़ी हुई है। केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इसे लेकर विपक्ष हमलावर है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र इसे विपक्ष से निपटने के लिए हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहता है। 

द्रमुक अध्यक्ष स्टालिन ने एक साक्षात्कार में कहा कि केंद्र सरकार को महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की वास्तविक चिंता नहीं है। यदि ऐसा होता तो इसे तुरंत लागू किया जाता, लेकिन इसके बजाय भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार इसे जनसंख्या आधारित परिसीमन प्रक्रिया से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मांग की कि परिसीमन को बहाना बनाए बिना महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाए।

परिसीमन पर चिंता जताते हुए स्टालिन ने कहा कि इससे तमिलनाडु जैसे राज्यों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि द्रमुक ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया और निष्पक्ष परिसीमन के लिए संयुक्त कार्रवाई समिति के तहत मुख्यमंत्रियों और सर्वदलीय बैठक बुलाई। इसमें 25 वर्ष तक परिसीमन रोकने और 1971 की जनगणना की आबादी के आधार को ही मान्य रखने की मांग की गई थी। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक लागू किया है, उन्हें दंडित नहीं किया जाना चाहिए। स्टालिन ने कहा कि उनकी पार्टी ने तमिलनाडु पोराडुम, तमिलनाडु वेल्लुम (तमिलनाडु संघर्ष करेगा, तमिलनाडु जीतेगा) का नारा दिया है और यही द्रमुक का रुख है। स्टालिन ने एआईएडीएमके प्रमुख ई. के. पलानीस्वामी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनका रुख तमिलनाडु के हितों के खिलाफ है।