मध्य प्रदेश में मार्च के दूसरे सप्ताह से ही गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश के कई शहरों में तापमान सामान्य से 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया गया है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में गर्मी का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। जबकि, भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों में भी पारा तेजी से बढ़ा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 मार्च के बाद तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, इसी दौरान वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण कुछ हिस्सों में बादल और हल्की बारिश की संभावना भी बन सकती है।

मंगलवार को प्रदेश में सबसे ज्यादा तापमान धार में 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इसके अलावा सागर में 38.9°C, रतलाम और नर्मदापुरम में 38.8°C, खजुराहो में 38.3°C, गुना में 38.1°C और दमोह व टीकमगढ़ में करीब 38°C तापमान रिकॉर्ड किया गया था। अन्य शहरों में भी पारा 34 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा था। बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर में 37.2°C, उज्जैन में 37°C, इंदौर में 36.8°C, जबलपुर में 36.6°C और भोपाल में 36.2°C तापमान दर्ज किया गया था।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार तापमान में इस तेजी की बड़ी वजह हवा की दिशा में बदलाव है। अभी प्रदेश में हवा उत्तर-पूर्व की बजाय पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा से चल रही है। इन हवाओं में नमी बेहद कम है और यह राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से होकर मध्य प्रदेश तक पहुंचती हैं। जिससे गर्मी का असर जल्दी महसूस होने लगा है।

पिछले साल के आंकड़ों को देखें तो आमतौर पर प्रदेश में 15 मार्च के बाद ही तेज गर्मी पड़ती थी लेकिन इस बार ट्रेंड थोड़ा बदल गया है। दूसरे पखवाड़े की बजाय मार्च की शुरुआत में ही तापमान में उछाल देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दिनों में भोपाल, इंदौर और उज्जैन में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच सकता है। जबकि, रात का तापमान 10 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।

हालांकि, 15 मार्च के आसपास मौसम में हल्का बदलाव भी देखने को मिल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में बादल छाने और हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना जताई गई है। मार्च के महीने में आमतौर पर दिन गर्म और रातें ठंडी रहती हैं इसलिए इस बार भी प्रदेश में तीनों मौसम गर्मी, हल्की ठंड और बारिश का मिश्रित असर देखने को मिल सकता है।

डॉक्टरों के अनुसार  मार्च का यही बदलता मौसम लोगों की सेहत पर भी असर डालता है। दिन में गर्मी और सुबह-शाम हल्की ठंड रहने से सर्दी-जुकाम, एलर्जी और अस्थमा के मरीज बढ़ जाते हैं। खासकर बच्चे और बुजुर्ग इस मौसम में जल्दी प्रभावित होते हैं। ऐसे में सुबह और देर रात की ठंडी हवा से बचने और खान-पान में सावधानी रखने की सलाह दी जा रही है।

मौसम विभाग का अनुमान, है कि मार्च में भले ही पारा बढ़ा हुआ रहे लेकिन लू चलने की स्थिति नहीं बनेगी। असली गर्मी अप्रैल और मई में पड़ेगी। इन महीनों में ग्वालियर-चंबल, रीवा, शहडोल, सागर और जबलपुर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है और करीब 15 से 20 दिन तक हीटवेव की स्थिति बन सकती है।

इस साल मौसम का मिजाज फरवरी में भी कई बार बदला था। प्रदेश में चार बार ओले, बारिश और आंधी का दौर देखने को मिला था। जिससे फसलों को नुकसान हुआ और सरकार को प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे भी कराना पड़ा था। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तर और मध्य भारत में फरवरी के दौरान वेस्टर्न डिस्टरबेंस कम सक्रिय रहे और कई जगह एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन गया था। इससे बादल कम बने और सूरज की गर्मी सीधे जमीन तक पहुंचने लगी जिसके कारण तापमान तेजी से बढ़ा।

देश के अन्य राज्यों में भी गर्मी का असर बढ़ रहा है। राजस्थान में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। जबकि, उत्तर प्रदेश में कई शहरों में 38 डिग्री के आसपास पारा दर्ज किया गया है। मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले महीनों में अगर अल नीनो की स्थिति बनती है तो गर्मी का दौर लंबा हो सकता है और मानसून भी प्रभावित हो सकता है।