भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने मैगी नूडल्स के एक पैकेट में कीड़े मिलने की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए नेस्ले इंडिया को नोटिस जारी किया है। नियामक संस्था ने कंपनी से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगने के साथ-साथ तत्काल एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सौंपने को कहा है। शिकायत से जुड़े बैच को बाजार से हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसी क्रम में खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता संबंधी शिकायतों को लेकर केएफसी, फ्लिपकार्ट इंडिया और ओपन सीक्रेट को भी नोटिस भेजे गए हैं।

एफएसएसएआई ने नेस्ले से तीन प्रमुख पहलुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी है। सबसे पहले कंपनी को यह बताना होगा कि विवादित बैच के उत्पादन में इस्तेमाल किया गया कच्चा माल किन सप्लायर्स से प्राप्त हुआ था और उत्पाद बाजार में भेजने से पहले उसकी गुणवत्ता जांच किस प्रकार की गई थी। इसके अलावा कंपनी से पूछा गया है कि शिकायत सामने आने के बाद संबंधित बैच तथा उससे प्रभावित हो सकने वाले अन्य उत्पादों को बाजार और सप्लाई चेन से हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली में किए जाने वाले सुधारों की भी जानकारी मांगी गई है।

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दूसरी ओर नेस्ले इंडिया ने मैगी में कीड़े मिलने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह दावा एक अप्रमाणित सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, शिकायत करने वाले व्यक्ति से संपर्क नहीं हो पाया है। जिसके कारण संबंधित पैकेट या नमूना कंपनी को जांच के लिए उपलब्ध नहीं कराया जा सका। नेस्ले का कहना है कि उसने बैच से जुड़े सभी गुणवत्ता रिकॉर्ड, परीक्षण रिपोर्ट और बाजार से लिए गए नमूनों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को प्रस्तुत कर दी है।

कंपनी ने यह भी दावा किया है कि संबंधित बैच के नमूनों की जांच उसके आंतरिक गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र के अलावा एफएसएसएआई से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में भी कराई गई। जांच रिपोर्ट में किसी प्रकार के कीड़े, संक्रमण या इन्फेस्टेशन के प्रमाण नहीं मिले। नेस्ले के मुताबिक, उसके सभी उत्पादन संयंत्रों में खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता के सख्त मानकों का पालन किया जाता है और वह जांच एजेंसियों के साथ पूरी पारदर्शिता से सहयोग कर रही है।

यह मामला नेस्ले के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मैगी कंपनी का सबसे लोकप्रिय और सबसे अधिक बिकने वाला उत्पाद है। साल 2015 में भी मैगी एक बड़े खाद्य सुरक्षा विवाद का सामना कर चुकी है। उस समय एफएसएसएआई ने उत्पाद में निर्धारित सीमा से अधिक लेड (सीसा) और लेबलिंग संबंधी अनियमितताओं का हवाला देते हुए मैगी को बाजार से वापस मंगाने का आदेश दिया था। उस विवाद का असर कंपनी की बिक्री और उपभोक्ताओं के भरोसे पर लंबे समय तक देखा गया था।

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विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा मामला भले ही अभी जांच के चरण में हो लेकिन इससे ब्रांड की प्रतिष्ठा पर असर पड़ सकता है। ऐसे समय में जब खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर उपभोक्ता पहले से अधिक जागरूक हैं। किसी भी तरह की शिकायत तेजी से व्यापक चर्चा का विषय बन जाती है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक नई प्रवृत्ति की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। सोशल मीडिया पर सामने आने वाली उपभोक्ता शिकायतें अब सीधे नियामक संस्थाओं की कार्रवाई का आधार बन रही हैं। नेस्ले, केएफसी, फ्लिपकार्ट इंडिया और ओपन सीक्रेट को एक साथ नोटिस जारी किया जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उठी शिकायतों को अब अधिक गंभीरता से लिया जा रहा है। इससे कंपनियों के लिए प्रतिष्ठा और कानूनी अनुपालन दोनों के स्तर पर चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

भारत में मैगी की शुरुआत साल 1984 में हुई थी। शुरुआत में इसे उन उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर पेश किया गया था जो कम समय में भोजन तैयार करना चाहते थे। आर्थिक उदारीकरण के बाद बदलती जीवनशैली और व्यापक विज्ञापन अभियानों की बदौलत मैगी देश के करोड़ों परिवारों की रसोई तक पहुंच गई। आज यह नेस्ले इंडिया के सबसे मजबूत ब्रांड्स में गिनी जाती है। यही कारण है कि इससे जुड़ा कोई भी गुणवत्ता या खाद्य सुरक्षा विवाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन जाता है।

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