मध्यप्रदेश में दो से अधिक संतान संबंधी नियम के तहत एक सरकारी अधिकारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। पंजीयन विभाग ने सिंगरौली में पदस्थ सब रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार को नौकरी से हटाने का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दो से अधिक संतान के आधार पर सरकारी कर्मचारियों की नौकरी नहीं जाने देने की बात कही थी।
पंजीयन विभाग के महानिरीक्षक (आईजी) अमित तोमर ने गुरुवार को बर्खास्तगी का आदेश जारी किया था। आदेश शुक्रवार को सार्वजनिक रूप से सामने आया। विभागीय जांच में यह पाया गया कि शासकीय सेवा के दौरान परिहार की तीसरी संतान का जन्म हुआ था। जिसके बाद उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई।
मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि अशोक सिंह परिहार की तीसरी संतान का जन्म सेवा अवधि के दौरान हुआ है। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया और फिर विस्तृत विभागीय जांच के आदेश दिए। जांच अधिकारी के रूप में वरिष्ठ जिला पंजीयक जबलपुर पवन अहिरवार को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
जांच के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों और अभिलेखों की पड़ताल में सामने आया कि परिहार की तीसरी संतान अभिषेक सिंह का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। कलेक्टर सिंगरौली की संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट, जन्म संबंधी दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आरोपों की पुष्टि हुई। जांच अधिकारी ने 9 दिसंबर 2025 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में भी परिहार को दोषी माना था।
अपने बचाव में अशोक सिंह परिहार ने कहा था कि उन्हें दो से अधिक संतान संबंधी सेवा नियमों की जानकारी नहीं थी और विभाग की ओर से भी इस विषय में कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। हालांकि, विभाग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आदेश में उल्लेख किया गया कि परिहार साल 1992 से नियमित सरकारी सेवा में थे। इसलिए यह मानना उचित नहीं है कि उन्हें सेवा नियमों की जानकारी नहीं थी।
इस कार्रवाई ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि 9 जून को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के उस मसौदा प्रावधान को निरस्त करने के निर्देश दिए थे। जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य घोषित करने का प्रस्ताव रखा गया था। मुख्यमंत्री ने संबंधित ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाने और संशोधित प्रस्ताव लाने के निर्देश भी दिए थे।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद यह माना जा रहा था कि दो से अधिक संतान से जुड़े मामलों में सरकारी कर्मचारियों को राहत मिल सकती है। हालांकि, पंजीयन विभाग का कहना है कि सरकार की ओर से अब तक कोई नया या संशोधित आदेश जारी नहीं किया गया है। ऐसे में वर्तमान में लागू नियमों के आधार पर ही कार्रवाई की गई है।
वर्तमान नियम 10 मार्च 2000 को जारी अधिसूचना पर आधारित हैं। इसके अनुसार, जिन व्यक्तियों की दो से अधिक जीवित संतान हैं और उनमें से किसी एक संतान का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है वे शासकीय सेवा के लिए पात्र नहीं माने जाते। विभाग के अनुसार, अशोक सिंह परिहार का मामला इसी प्रावधान के अंतर्गत आता है।
बर्खास्तगी के बाद परिहार के पास विभागीय अपील का विकल्प उपलब्ध है। वे शासन स्तर पर इस आदेश को चुनौती दे सकते हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं। वहीं, यदि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप सरकार भविष्य में कोई नया आदेश जारी करती है तो इस मामले में कानूनी स्थिति बदलने की संभावना भी बन सकती है।