मंडला। मध्यप्रदेश के मंडला जिले स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में अमाही फीमेल बाघिन T-141 के तीसरे शावक की मौत हो गई। शनिवार शाम सरही परिक्षेत्र की सरही नकान बीट के उमरपानी क्षेत्र में मादा शावक मृत अवस्था में मिला। लगातार छह दिनों के भीतर बाघिन के तीन शावकों की मौत हो चुकी है। इसके बाद वन विभाग ने रविवार को बाघिन और उसके एकमात्र जीवित शावक का रेस्क्यू कर उन्हें मुक्की क्वारंटीन सेंटर भेज दिया है।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मृत मादा शावक के शव को पोस्टमार्टम और विस्तृत जांच के लिए जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय भेज दिया गया है। रिपोर्ट करीब सात दिन में आने की संभावना है। जिसके बाद मौत की असली वजह स्पष्ट हो सकेगी।
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इससे पहले बीते 21 अप्रैल को बाघिन के एक नर शावक का शव बड़े अमाही नाले के पास मिला था। इसके तीन दिन बाद 24 अप्रैल को दूसरे नर शावक का शव ईंटावारे नाले में बरामद हुआ था। शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों शावकों के पेट खाली पाए गए थे। जिससे भूख और शिकार नहीं कर पाने की आशंका जताई गई थी। अब तीसरे शावक की मौत ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
जानकारी के मुताबिक, वन प्रबंधन को 17 अप्रैल को ही एक शावक की कमजोर स्थिति की सूचना मिल गई थी। इसके बाद हाथी गश्ती दल को सर्च ऑपरेशन के लिए लगाया गया था। लेकिन टीम के मौके पर पहुंचने से पहले ही शावक की मौत हो चुकी थी। इसके बाद लगातार दो और शावकों की मौत ने रिजर्व प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इस उम्र के शावक खुद शिकार करने में सक्षम नहीं होते और पूरी तरह अपनी मां पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बाघिन शिकार क्यों नहीं कर पा रही थी और उसकी हालत कमजोर कैसे हुई। जानकारी के अनुसार, अपने शावकों की मौत के बाद बाघिन ने खाना पीना भी कम कर दिया था और लंबे समय से उसी इलाके में बैठी हुई थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने रविवार को विशेष अभियान चलाया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से बुलाए गए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने बाघिन और उसके जीवित शावक को ट्रैंक्विलाइज कर सुरक्षित रेस्क्यू किया। दोनों को मुक्की रेंज के क्वारंटीन सेंटर में रखा गया है। वहां उनका इलाज और स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। जांच के लिए स्वैब, ब्लड और अन्य सैंपल भी लिए गए हैं।
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घटना के बाद डॉ. समिता रजौरिया और एल. कृष्णमूर्ति समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने कान्हा पहुंचकर हालात की समीक्षा की। वन विभाग का कहना है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा निर्देशों के तहत पूरे मामले में मानक प्रक्रिया अपनाई गई है। घटनास्थल की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर ली गई है। कान्हा में अप्रैल महीने के दौरान अब तक चार बाघों की मौत हो चुकी है। जबकि, पिछले आठ महीनों में 10 बाघ और 5 तेंदुओं की मौत के आंकड़े सामने आ चुके हैं।