बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी के तेवर चर्चा में हैं। उनके बेटे ने थार गाड़ी से दो छात्राओं सहित पांच लोगों को कुचल दिया। हालांकि किसी की मौत नहीं हुई लेकिन मामला तब से बिगड़ता जा रहा है जबसे बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी अपने बेटे के बचाव में आए हैं। पुत्र मोह में करैरा के एसडीओपी आईपीएस अधिकारी आयुष जाखड़ को चेतावनी देते हुए प्रीतम सिंह लोधी ने कहा कि वे 5 से 10 हजार लोगों के साथ एसडीओपी के बंगले का घेराव करेंगे और उसे गोबर से भर देंगे। वीडियो में उन्होंने आक्रामक अंदाज में यह भी कहा कि पहले उनका हाथ ढ़ाई किलो का था, अब ढ़ाई सौ किलो का है और वे जाखड़ को ठीक कर देंगे।
वायरल वीडियो में विधायक प्रीतम लोधी कहते नजर आ रहे हैं, “करेरा क्या तुम्हारे डैडी का है?” उन्होंने अपने बेटे दिनेश लोधी को लेकर भी बड़ा एलान करते हुए कहा कि उनका बेटा करेरा जाएगा और वहीं से चुनाव भी लड़ेगा।
प्रीतम लोधी ने एसपी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि एसपी ने कहा कि “दिल्ली से कॉल आ रहा है।” इस पर प्रीतम लोधी ने सवाल किया कि आखिर वह कॉल किसका है? क्या यह कॉल नरेंद्र मोदी, अमित शाह या ज्योतिरादित्य सिंधिया में से किसी का है? उन्होंने यह भी पूछा कि एसपी की सीधी बातचीत आखिर किससे होती है।
चर्चा इस बात की है कि बेटे को राजनीतिक षडयंत्र में फंसाने का आरोप लगाते–लगाते विधायक प्रीतम लोधी ने अपने ‘आका’ केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम क्यों उछाला? सभी जानते हैं कि अपने व्यवहार के कारण प्रीतम लोधी को 2022 में बीजेपी से निष्कासन कर दिया गया था। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों से ही 2023 में उनकी बीजेपी में वापसी संभव हुई। प्रीतम लोधी पिछोर से 6 बार के विधायक केपी सिंह को हराकर विधानसभा में पहुंचे हैं। सिंधिया गुना से सांसद हैं और प्रीतम लोधी लगातार स्वयं को सिंधिया समर्थक बताते हैं।
प्रीतम लोधी के बयानों पर आईपीएस एसोसिएशन सहित अन्य कर्मचारी संगठनों ने गहरी आपत्ति जताई है। विधायक प्रीतम लोधी के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं। अब बीजेपी से सवाल है कि अपने विधायक पर वह क्या कार्रवाई करती है? राजनीतिक विश्लेषण बताते हैं कि सत्ता के मद में प्रीतम लोधी ने मोदी, शाह के साथ सिंधिया का नाम उछाल कर अपने फंदे को और कस लिया है। क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरण भले ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को विधायक प्रीतम लोधी के करीब रखे मगर बयान की चुभन तो रहेगी।
नारी शक्ति वंदन के लिए राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन
मध्यप्रदेश में भी नारी शक्ति वंदन को लेकर सियासत आने वाले दिनों में चरम पर पहुंचने वाली है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस सहित विपक्ष ने साथ नहीं दिया इसलिए बिल पारित नहीं हो सका। इस रवैये पर निंदा प्रस्ताव के लिए 27 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में भी निंदा प्रस्ताव होगा। मध्य प्रदेश बीजेपी द्वारा ने भोपाल में आक्रोश पदयात्रा निकाली थी, इसमें मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव के अलावा महिला मंत्री, सांसद और बीजेपी कार्यकर्ता शामिल हुए थे।
इसके जवाब में अब कांग्रेस 24 अप्रैल को भोपाल में रैली निकालने जा रही है। कांग्रेस के मुताबिक राजधानी भोपाल के बाद प्रदेश भर में इस तरह की रैलियां निकालकर बीजेपी के झूठ का पर्दाफाश किया जाएगा। आरक्षण बिल 2023 में पारित हो चुका है उसे लागू करने पर सियासत है।
कांग्रेस ने 2023 के बिल को पारित करने में देरी और 'परिसीमन व जनगणना' की शर्तों का विरोध किया है। कांग्रेस का मुख्य पक्ष यह है कि 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू हो, ओबीसी महिलाओं के लिए उप-कोटा (कोटा के भीतर कोटा) हो और इसे जनगणना-परिसीमन से न जोड़ा जाए। यानी 33 फीसदी आरक्षण लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों पर ही देना चाहिए ना कि डीलिमिटेशन के आधार पर बढ़ाई गई सीटों पर।बीजेपी जनता के बीच माहौल बनाने का जतन कर रही है। इस प्रचार का माकूल जवाब देने के लिए कांग्रेस को भी दूनी ताकत से मैदान में उतरना पड़ेगा।
कड़वाहट मिटाने बीजेपी में फिर खुलेंगे टिफिन
बात कार्यकर्ताओं तक मैसेज पहुंचाने की हो तो बीजेपी कोई न कोई रास्ता खोजती रहती है। लंबे समय तक सत्ता में रहने से कार्यकर्ताओं की अपेक्षाएं और नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसे दूर करने के लिए पार्टी ने सख्ती से कैलेंडर लागू किया है। नेताओं की इस कैलेंडर के अनुसार हर माह की तय अवधि में ये गतिविधियां जैसे मीटिंग, दौरे, मुलाकात आदि करने होंगे। इसी क्रम में कार्यकर्ताओं के बीच आपसी सामंजस्य बढ़ाने के लिए बीजेपी ने महीने के अंतिम सप्ताह में 'टिफिन बैठक' जैसी पहल फिर शुरू करने जा रही है। हर माह 23 से 30 तारीख के बीच शक्ति केंद्र टोली की बैठकों के बाद टिफिन बैठक का आयोजन रखा जाएगा। इसके साथ ही महीने के अंतिम रविवार को बूथ स्तर पर 'मन की बात' कार्यक्रम सुना जाएगा। इस दौरान बूथ की 11 सदस्यीय टोली के साथ ही स्थानीय वरिष्ठ कार्यकर्ता और प्रमुख मतदाताओं को भी कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। कैलेंडर के पालन पर तो जोर है ही, टिफिन बैठक को अनिवार्य रूप से करने की हिदायत दी गई है। पार्टी का मानना है कि साथ बैठ कर खाना खाएंगे तो मन की कड़वाहट दूर होने की गुंजाइश बनी रहेगी।
बीजेपी में ग्वालियर–चंबल की जय जयकार
लंबे समय बाद बीजेपी ने कोर ग्रुप का गठन किया है। कोर ग्रुप में ग्वालियर चंबल से केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, एससी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया को शामिल किया गया है। मालवा से डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय हैं। जबकि विंध्य से राजेन्द्र शुक्ल हैं। महाकौशल से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, मंत्री राकेश सिंह, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, मंत्री संपतिया उईके हैं। जबकि मंत्री प्रहलाद पटेल, सांसद व प्रदेश महामंत्री लता वानखेड़े बुंदेलखंड से है। इस तस्वीर का खास पहलू यह है कि एकमात्र ग्वालियर हैं जहां से तीन नेता शामिल किये गये हैं जो फिलहाल मंत्री नहीं हैं। इन्हें शामिल करने का खास राजनीतिक समीकरण हैं। ग्वालियर में बन रहे सत्ता केन्द्रों के संतुलन के लिए यह कवायद की गई है। यह संतुलन बुंदेलखंड में नहीं साधा गया। बुंदेलखंड में भी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह और गोपाल भार्गव जैसे दिग्गजों में वर्चस्व का संघर्ष है मगर वहां पार्टी ने संतुलन नहीं साधा। यह बीजेपी की राजनीतिक प्राथमिकताओं को दिखाता है।