भोपाल। राजधानी भोपाल में बढ़ते वायु प्रदूषण और जनस्वास्थ्य पर मंडराते खतरे को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की केंद्रीय पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने स्वतः संज्ञान लेते हुए शहर के कबाड़खाना और पुराने रिहायशी इलाकों में संचालित अवैध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग इकाइयों को तत्काल आवासीय क्षेत्रों से बाहर करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने माना कि इन गतिविधियों से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है और लाखों लोगों का स्वास्थ्य खतरे में है।

एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने स्पष्ट किया है कि साल 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक पर देशभर में प्रतिबंध लागू होने के बावजूद भोपाल में इसका खुलेआम उपयोग और अवैध रीसाइक्लिंग जारी है। ट्रिब्यूनल के अनुसार, प्रतिदिन करीब 10 से 12 टन प्लास्टिक कचरा भोपाल नगर निगम के ट्रांसफर स्टेशनों और आदमपुर छावनी कचरा डंपिंग क्षेत्र तक पहुंच रहा है। इसके अलावा लगभग इतनी ही मात्रा अनौपचारिक कबाड़ी नेटवर्क के जरिए कबाड़खानों में पहुंचकर नियमों को ताक पर रखकर रीसायकल की जा रही है। इसे एनजीटी ने कानून का खुला उल्लंघन बताया है।

पुराने शहर के कमल खान इलाके सहित संकरी गलियों में चल रही ये अवैध फैक्ट्रियां हवा में जहरीला धुआं और माइक्रोप्लास्टिक छोड़ रही हैं। ट्रिब्यूनल ने कहा कि इससे वायु गुणवत्ता तेजी से बिगड़ रही है और आसपास रहने वाले लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो रहे हैं। इन क्षेत्रों के आसपास करीब दो लाख लोग रहते हैं जो सीधे तौर पर इस प्रदूषण की चपेट में है।

एनजीटी ने कबाड़खाना इलाकों में ई-वेस्ट के अवैध विघटन पर भी गहरी चिंता जताई है। रिपोर्ट में सामने आया है कि कीमती धातु निकालने के लिए ई-वेस्ट को खुलेआम जलाया जाता है जिससे जहरीली गैस निकलती हैं और पूरा वातावरण दूषित करती हैं। हालात इतने खराब हैं कि इन इलाकों में सप्ताह में औसतन दो बार आग लगने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।

प्रदूषण के स्तर को लेकर पेश किए गए अध्ययन में कबाड़खाना क्षेत्र में पीएम-10 का स्तर 225 तक दर्ज किया गया है जो इसे भोपाल के सबसे अधिक प्रदूषित इलाकों में शामिल करता है। एनजीटी ने मल्टी लेयर्ड प्लास्टिक और माइक्रोप्लास्टिक के बढ़ते खतरे को भी गंभीर माना है और इस पर सख्त रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

ट्रिब्यूनल ने मध्यप्रदेश सरकार, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भोपाल नगर निगम को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट कहा है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा और उज्जैन नगर निगमों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने शहरों में अवैध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग और कचरा प्रबंधन की स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करें।

एनजीटी ने सभी संबंधित विभागों से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत अनुपालन और कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा है कि सरकार को एक ठोस कार्य योजना पेश करनी होगी जिसमें अवैध फैक्ट्रियों को बंद करना, कचरा प्रबंधन की सख्त व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण के लिए संयुक्त समिति की रिपोर्ट शामिल हो। निर्देशों की अनदेखी होने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च 2026 को होगी।