ग्वालियर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार की नीतियों और देश में लगातार हो रहे पेपर लीक के मामलों को लेकर आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने नीट (NEET) परीक्षा में लगातार हो रही धांधलियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बर्खास्तगी की मांग की है, साथ ही सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी कड़े सवाल उठाए हैं।

ग्वालियर में रविवार को पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नीट परीक्षा में हो रहे घोटालों पर सरकार को जमकर घेरा। दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश में लगातार चौथी-पांचवीं बार नीट का पेपर लीक हुआ है। इस साल लगभग 22 लाख छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है और उन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ रही है। भाजपा शासित राज्यों से पेपर लीक की लगातार शिकायतें आ रही हैं और यह छात्रों के भविष्य के साथ खुलेआम व्यापार हो रहा है।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि साल 2017, 2021, 2024, 2025 और अब 2026 में भी पेपर लीक हुआ। इस बार जो आरोपी पकड़ा गया है, पिछले साल उसी के परिवार के पांच लोग मेडिकल कॉलेज में एडमिशन पा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक के जरिए करोड़ों रुपये कमाए जा रहे हैं।

शिक्षा से जुड़ी संसद की स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने बताया कि उनकी समिति ने नीट परीक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए दो विस्तृत प्रतिवेदन (रिपोर्ट) और सुझाव सौंपे थे, लेकिन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने उन्हें स्वीकार तक नहीं किया।

दिग्विजय सिंह ने बताया कि स्टैंडिंग कमेटी के सुझावों को नहीं मानने को लेकर जब पत्रकारों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से सवाल किया, तो उन्होंने यह कहकर समिति के सुझावों को खारिज कर दिया कि इसमें विपक्ष के लोग भी हैं। यह लोकतंत्र की बुनियाद और संसद का अपमान है। सिंह ने कहा कि मेरी अध्यक्षता में समिति ने जितनी भी रिपोर्ट दी हैं, वे भाजपा और विपक्ष के सांसदों की सर्वसम्मति से आई हैं, किसी में कोई 'डिसेंटिंग नोट' (विरोध) नहीं था। धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए, नहीं तो प्रधानमंत्री उन्हें तत्काल बर्खास्त करें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया भाषणों पर तंज कसते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि देश में गरीबों से लेकर अमीरों तक, शादियों और आयोजनों में सोना खरीदने की एक अटूट परंपरा है। एक तरफ प्रधानमंत्री जनता से सोना न खरीदने की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने सोने के आयात पर ड्यूटी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी है और खुद सरकार बड़ी मात्रा में सोना खरीद रही है। इस नीति के कारण देश के सुनार और उनके अंतर्गत काम करने वाले गरीब कारीगर भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।

दिग्विजय सिंह रविवार को रामाजी का पुरा स्थित हस्सू-हद्दू खां सभागार में आयोजित 'अल्पसंख्यक-अनुसूचित जाति सम्मेलन' में शामिल हुए हैं। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि देश में धर्म के नाम पर फैलाई जा रही नफरत को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। 

राज्यसभा सांसद सिंह ने देश की साझा संस्कृति पर जोर देते हुए कहा कि हमारा एकमात्र संदेश इंसानियत का है, जो भारत की मूल संस्कृति रही है। सनातन धर्म हजारों वर्ष पुराना है और उसके बाद जितने भी धर्म आए, सभी ने भारत की इस पावन संस्कृति को सहर्ष अपनाया। आज देश में नफरत का बाजार चलाया जा रहा है, जहां भाई को भाई से लड़ाने की कोशिशें हो रही हैं। हम धर्म के नाम पर इस बाजार को चलने नहीं देंगे और राहुल गांधी की 'मोहब्बत की दुकान' को निरंतर आगे बढ़ाएंगे।