नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के भीतर संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने संगठन को मजबूत किए बगैर आंदोलनों के ऐलान किए जाने को लेकर सवाल खड़े किए हैं। प्रियंका गांधी ने पार्टी की बैठक में कहा कि जब बूथ पर लोग ही नहीं हैं तो आंदोलन के ऐलान से क्या होगा?

दरअसल, कांग्रेस नेतृत्व ने गुरुवार को पार्टी के महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों और राज्य इकाइयों के अध्यक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में संगठन की स्थिति, बूथ स्तर पर पार्टी की मजबूती और मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई। इसी दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने संगठन की कमजोरी को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी ने बैठक में कहा कि केवल मुद्दों की घोषणा कर देने से राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जिन मुद्दों को बूथ स्तर तक ले जाने की बात की जा रही है, वहां पार्टी का संगठन आखिर है कहां? उनका कहना था कि जब कई जगहों पर बूथ स्तर का ढांचा ही मजबूत नहीं है, तो केवल घोषणाएं करने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सकते। उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रियंका गांधी ने पार्टी नेताओं को सलाह देते हुए कहा कि हर मुद्दे पर आंदोलन और प्रदर्शन करने की बजाय कांग्रेस को प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी को एक समय में जनता से जुड़े एक या दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर फोकस करके लगातार काम करना चाहिए। उनके अनुसार, सीमित लेकिन प्रभावी मुद्दों पर केंद्रित अभियान जनता तक अधिक मजबूती से पहुंच सकते हैं और पार्टी की पकड़ मजबूत कर सकते हैं।

बैठक के दौरान प्रियंका गांधी ने संकेत दिया कि आगामी चुनावी चुनौतियों का सामना करने के लिए केवल राजनीतिक बयानबाजी पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए मजबूत संगठन, सक्रिय कार्यकर्ता और बूथ स्तर तक पहुंच जरूरी है। उन्होंने पार्टी नेताओं को जमीनी स्तर पर काम बढ़ाने और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।

प्रियंका गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कांग्रेस पार्टी पिछले कुछ सालों से लगातार चुनावी हार, कमजोर संगठन और जमीन पर घटते प्रभाव से जूझ रही है। ऐसे समय में पार्टी की अंदरूनी बैठकों में अक्सर बड़े-बड़े आंदोलन, सरकार घेरने की रणनीति और जनहित के मुद्दों पर आक्रामक अभियान की बातें होती हैं। ऐसे में प्रियंका गांधी ने संगठन की मजबूती पर जोर देने की बात कही है।

इससे पहले CWC के एक महत्वपूर्ण बैठक में राज्यसभा सांसद व मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी संगठन को मजबूत करने की बात कह चुके हैं। सिंह ने भी कहा था कि आंदोलनों को जमीन पर उतारने और आम आदमी को उससे जोड़ने के लिए मजबूत संगठन का होना आवश्यक है। बहरहाल, अब देखना दिलचस्प होगा कि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठनात्मक पुनर्गठन को लेकर क्या कदम उठाती है।