भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर में भ्रष्टाचार और धार्मिक आस्था के नाम पर हो रही अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के नाम पर सत्ता में आने वाले लोग यदि मंदिर के चढ़ावे और दान की राशि में गड़बड़ी करते हैं, तो उन्हें रामभक्त नहीं कहा जा सकता। दिग्विजय सिंह ने अपनी आगामी "सनातन स्वाभिमान यात्रा" को धर्म के नाम पर अधर्म के खिलाफ जनजागरण का अभियान बताया है।
दिग्विजय सिंह ने अपने वक्तव्य में राम मंदिर के चढ़ावे में मिली नकदी, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी के आभूषणों की चोरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच में 2 से 3 करोड़ रुपये नकद और आभूषणों की चोरी स्वीकार किए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने इस पूरे मामले में 200 से 300 करोड़ रुपये की चोरी की आशंका जताते हुए जांच और जवाबदेही की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राम मंदिर निर्माण के ठेकों में कमीशनखोरी, मंदिर के आसपास जमीनों की खरीद और प्राण प्रतिष्ठा समारोह से जुड़े भुगतान में अनियमितताओं के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धालुओं ने 3264 करोड़ रुपये दान दिए, जबकि शुरुआत में निर्माण की अनुमानित लागत 800 करोड़ रुपये बताई गई थी और बाद में लागत 2200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि ऐसे में दान की राशि का हिसाब मांगना अधर्म कैसे हो सकता है?
दिग्विजय सिंह ने 1989 में विश्व हिंदू परिषद द्वारा चलाए गए रामशिला पूजन अभियान का जिक्र करते हुए चंदे का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि अभियान के दौरान एकत्रित की गई चांदी की ईंटें कहां गईं और चंदे का पूरा हिसाब क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि वे आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद की विचारधारा का समर्थन नहीं करते, लेकिन भगवान राम के मंदिर निर्माण के पक्ष में रहे हैं और उन्होंने भी अपनी श्रद्धानुसार योगदान दिया था।
उन्होंने रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन पर भी सवाल उठाए। दिग्विजय सिंह के मुताबिक, मौजूदा ट्रस्ट में शंकराचार्यों, निर्मोही अखाड़े और गुरु गोरखनाथ ट्रस्ट की उपेक्षा की गई। उन्होंने कहा कि धर्म हृदय में श्रीराम को विराजमान करने का माध्यम है, व्यापार की वस्तु नहीं, जिसे सत्ता हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जाए।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी यात्रा का उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि भगवान राम के नाम पर सत्ता हासिल करने और फिर उन्हीं के नाम पर भ्रष्टाचार करने वालों से सवाल पूछना जरूरी है। उन्होंने कहा कि धर्म मनुष्य को चोरी, हिंसा, अत्याचार और अन्याय से दूर रहने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने बताया कि सनातन स्वाभिमान यात्रा 20 अक्टूबर को उज्जैन के भगवान महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर ओरछा में रामराजा सरकार के दर्शन के बाद अयोध्या स्थित राम मंदिर पहुंचेगी। दिग्विजय सिंह ने दोहराया कि यह यात्रा गैर राजनीतिक है और इसमें उन सभी लोगों का स्वागत है जो धार्मिक आस्था और मूल्यों की रक्षा में विश्वास रखते हैं।