मध्यप्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट अब गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुकी है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 2000 से अधिक फूड सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इनमें सबसे अधिक करीब 420 सैंपल ग्वालियर से फेल पाए गए हैं। दूध, मावा, पनीर और घी जैसे रोजमर्रा के डेयरी उत्पादों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी सामने आई है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है।

यह रिपोर्ट मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन द्वारा लिए गए नमूनों और उनके परीक्षण के आधार पर तैयार की गई है। इसमें पिछले तीन सालों के आंकड़े शामिल हैं। खास बात यह है कि मोबाइल वैन के संचालन के बाद पहली बार करीब एक लाख सैंपलों का समग्र विश्लेषण सामने आया है।

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मिलावटी भोजन के दुष्प्रभाव अब वास्तविक मामलों में भी दिखने लगे हैं। 23 वर्षीय राहुल शर्मा को दोस्तों के साथ बाहर खाना खाने के बाद तेज पेट दर्द और दस्त की शिकायत हुई। हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। जहां डॉक्टरों ने फूड पॉइजनिंग की पुष्टि की। चार दिन इलाज के बाद उन्हें छुट्टी मिली।

इसी तरह 29 वर्षीय सात्विक पंडित के मामले ने मिलावट के लंबे समय के खतरों को सामने लाया। उनकी जांच में विटामिन की कमी, हीमोग्लोबिन का असामान्य स्तर, हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज के शुरुआती संकेत मिले। उनका इलाज कर रहे कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. किसलय श्रीवास्तव ने उन्हें हार्ट डिजीज के जोखिम में बताया और नियमित दवा व मासिक फॉलोअप की सलाह दी।

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राज्य के विभिन्न जिलों में मिलावट का दायरा तेजी से फैलता दिख रहा है। ग्वालियर के बाद गुना में 110, उज्जैन में 95, भिंड में 90 और बुरहानपुर में 75 सैंपल फेल पाए गए। इसके अलावा शाजापुर, इंदौर, धार, रीवा, सागर, सीहोर और नरसिंहपुर समेत 30 से अधिक जिलों में भी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता संदिग्ध पाई गई है। जांच में दूध और मिठाइयों के साथ-साथ मसालों और तेल में भी बड़े पैमाने पर मिलावट सामने आई है।

गांधी मेडिकल कॉलेज के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. मनुज शर्मा के अनुसार, मिलावटी खाद्य पदार्थों में मौजूद एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स जैसे माइक्रोप्लास्टिक और भारी धातुएं शरीर के हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करती हैं। इससे गट हेल्थ खराब होती है, शरीर के लाभकारी बैक्टीरिया नष्ट होते हैं और पोषण की कमी बढ़ती है। लंबे समय में यह मोटापा, डायबिटीज और पीसीओडी जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है।

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सिर्फ डेयरी उत्पाद ही नहीं बल्कि लाल मिर्च, हल्दी, धनिया पाउडर और सोयाबीन तेल जैसे आम खाद्य पदार्थ भी सुरक्षित नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन मिलावटी उत्पादों का लगातार सेवन लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है और कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकता है।

मिठाइयों में भी मिलावट का स्तर चिंताजनक है। जलेबी, लड्डू, बर्फी, गजक और नमकीन जैसे उत्पादों के सैंपल बड़ी संख्या में फेल पाए गए हैं। दमोह, भिंड और मुरैना जैसे जिलों में त्योहारों के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

FDA आयुक्त दिनेश श्रीवास्तव ने बताया कि फेल पाए गए सैंपलों के आधार पर संबंधित दुकानदारों और निर्माताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। जुर्माना और कानूनी कार्रवाई लगातार जारी है। साथ ही प्रदेशभर में मोबाइल वैन के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है ताकि मिलावट के इस नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

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