इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों की संख्या 18 से बढ़कर 20 हो गई है। सरकार ने हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट में सिर्फ चार मौतें होना माना है, जबकि 18 मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपए की सहायता दी जा चुकी है। प्रशासन ने परिजन को मुआवजा देने के लिए बनाई गई सूची में बुधवार को दो नए नाम जोड़े। लेकिन सवाल ये है कि क्या दो लाख रुपए मुआवजा देने से सरकार की जिम्मेदारी पूरी हो गई? इन मौतों के लिए जिम्मेदारी तय कब होगी? पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने भी जिम्मेदारी तय करने की बात कही है।

दिग्विजय सिंह ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि इंदौर मेरे बचपन का शहर, मेरे राज्य का सबसे विकसित शहर और देश का सबसे स्वच्छ शहर है। राज्य की आर्थिक राजधानी मे इसकी गिनती होती है और उसी इंदौर शहर में 18 लोग गंदा पानी पीने से मर जाते हैं। 
आँकड़ा जब तक 2/4 मौत का रहा किसी ने साँस नहीं ली लेकिन मौतों की गिनती बढ़ने लगी तो ज़िम्मेदारी की टोपी सब दूसरे को पहनाना शुरू कर दिए। मंत्री अफ़सर को, अफ़सर मेयर को, मेयर व्यवस्था को और व्यवस्था.. घंटा की लड़ाई पर उलझ गयी।

राज्यसभा सांसद सिंह ने आगे कहा कि प्रभारी मुख्यमंत्री जी से कोई सवाल नहीं पूछ रहा कि हर दूसरे दिन शहर में आते हैं और वो महज़ मौत का मुआवजा देकर चुप क्यों हो गए? सिंह ने कड़े शब्दों में कहा कि कुछ ट्रांसफ़र और मुआवजे से शहर का कलंक नहीं धुलता। उन्होंने इस हादसे की न्यायिक जांच की माँग की है। साथ ही कहा कि पब्लिक के सामने सुनवाई हो और हाईकोर्ट के सिटिंग जज से इसकी जांच करायी जाए।  

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मौत के मुआवजे से ज़िन्दगी नहीं लौटती। ग़लतियों पर पर्दा डालने की बजाय ग़लतियों की ज़िम्मेदारी तय हो और उन्हें दण्डित किया जाए। बता दें कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से मौतों का आंकड़ा बढ़कर 20 हो गया है। इतनी मौतों के बाद यहां लोग डरे-सहमे हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने सप्लाई वाटर का इस्तेमाल बंद कर दिया है। स्थानीय रहवासी टैंकरों और आरओ के पानी पर निर्भर हैं। प्रशासन के मुताबिक इंदौर में अब तक 429 लोग अस्पतालों में भर्ती हुए थे, जिनमें से मंगलवार शाम तक 330 डिस्चार्ज हो चुके हैं। बुधवार को 6 मरीज और भर्ती हुए हैं, यानी अब 105 मरीज ही एडमिट हैं।

इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में मंगलवार को दूषित पेयजल से जुड़े मामले में 5 याचिकाओं की एक साथ सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस घटना ने इंदौर शहर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर अब दूषित पानी की वजह से पूरे भारत में चर्चा का विषय बन गया है।