अहमदाबाद। दुनिया पर एक बार फिर एक खतरनाक महामारी का साया मंडराता नजर आ रहा है। अफ्रीका के कुछ देशों में इबोला वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। विश्व स्तर पर बढ़ते इस खतरे को देखते हुए भारत सरकार भी पूरी तरह अलर्ट हो गई है। एहतियातन अफ्रीकी देशों (युगांडा, दक्षिण सूडान और कांगो) से अहमदाबाद आए 11 मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा गया है।
अहमदाबाद कॉर्पोरेशन के अधिकारी डॉ. भाविन सोलंकी ने बताया कि प्राथमिक जांच में इनमें से कोई भी संदिग्ध नहीं पाया गया है। लेकिन, एहितायन यह कदम उठाया है। भारत सरकार ने भी बुधवार को बताया कि देश में इबोला वायरस से जुड़ा एक भी मामला नहीं है। सरकार को यह स्पष्टीकरण इसलिए देना पड़ा क्योंकि युगांडा से भारत आई एक महिला में इबोला जैसे लक्षण देखे गए थे। हालांकि बाद में महिला की रिपोर्ट नेगेटिव आई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह महिला 23 मई को बेंगलुरु एयरपोर्ट पहुंची थी। जिसके बाद उसे एहतियातन सरकारी अस्पताल में आइसोलेशन में रखा गया। महिला के शरीर में हल्का दर्द था, हालांकि अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। अफ्रीकी देश कांगो से फैला वायरस युगांडा तक पहुंच गया है। युगांडा में इबोला के 8 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, कांगो में 24 अप्रैल को इबोला वायरस से एक महिला की मौत हुई थी। अब तक वहां इस वायरस से 80 लोगों की जान जा चुकी है।
इबोला वायरस डिसीज (EVD) इसलिए बेहद खतरनाक है क्योंकि इसके पीड़ित मरीजों में 25% से 90% तक की मौत होती है। इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। उस समय सूडान और तत्कालीन जायरे (अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) में इसके मामले मिले थे। कांगो में जिस इलाके में यह वायरस मिला, उसके पास बहने वाली इबोला नदी के नाम पर इसका नाम रखा गया। यह जानलेवा बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी और शरीर के दूसरे तरल पदार्थ के संपर्क से फैलती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। हालांकि, WHO का कहना है कि यह महामारी की कैटेगरी में नहीं आता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बार इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन मिला है, जबकि कांगो में पहले ज्यादातर मामले जायरे स्ट्रेन के रहे हैं। इससे चिंता बढ़ी है, क्योंकि इबोला के मौजूदा कई इलाज और टीके जायरे स्ट्रेन को ध्यान में रखकर बनाए गए थे।