नई दिल्ली। चीनी घुसपैठ को लेकर संसद में विपक्ष हमलावर हो गया है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत–चीन सीमा पर हालात का मुद्दा उठाया। वहीं, राज्यसभा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने चीन पर 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर कब्जा करने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस पर स्पष्ट जवाब मांगा।

राज्यसभा में सोमवार को कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा की शुरुआत करते हुए अपने संबोधन में कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस गंभीर विषय को उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने भारत के करीब 2000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह दावा किसी राजनीतिक बयान पर नहीं, बल्कि एसपी लद्दाख की आधिकारिक नोटिंग पर आधारित है, जिसमें बताया गया है कि पूर्वी लद्दाख में 65 में से 26 पेट्रोलिंग प्वाइंट्स पर चीन का कब्जा है। उन्होंने इस मुद्दे पर पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के बयानों का भी हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में आकर देश को सच्चाई बतानी चाहिए।

सिंह ने अपने संबोधन में आगे कहा कि सरकार लगातार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की बात करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे मेल नहीं खाती। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस ‘सब’ में अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी और ईसाई समुदाय भी शामिल हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि सामाजिक सौहार्द कमजोर हुआ है और देश में आर्थिक असमानता तेजी से बढ़ी है, जो सरकार के दावों के ठीक उलट तस्वीर पेश करती है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक समुदायों को समान अवसर और न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर घरों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं, जबकि दोषी को सजा देना अलग बात है, लेकिन उसके परिवार को दंडित करना असंवैधानिक है। सिंह ने उमर खालिद और शरजील इमाम का जिक्र करते हुए कहा कि वे वर्षों से जेल में हैं, लेकिन अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई। उन्होंने हेट स्पीच के मामलों पर भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए।

दिग्विजय सिंह ने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उन्होंने केवल छठी अनुसूची लागू करने की मांग की थी, जो प्रधानमंत्री द्वारा चुनाव के दौरान किया गया वादा था। इसके बावजूद उन्हें लंबे समय तक हिरासत में रखा गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सिंह ने कहा कि सरकार को इस पूरे प्रकरण पर भी स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

आर्थिक मोर्चे पर हमला बोलते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश में असमानता ब्रिटिश शासन के दौर से भी ज्यादा बढ़ चुकी है। उन्होंने वर्ल्ड इनइक्वालिटी लैब के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में शीर्ष 10 फीसदी लोगों के पास अधिकांश संपत्ति सिमट गई है, जबकि निचले 50 फीसदी को बेहद कम हिस्सा मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉरपोरेट टैक्स में छूट दी जा रही है, जबकि आम आदमी पर टैक्स का बोझ बढ़ता जा रहा है और रोजगार के अवसर लगातार घट रहे हैं।