नई दिल्ली। शहरी गरीबों और महिलाओं को रोजगार व स्वरोजगार से जोड़ने वाली केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन योजना को लेकर पांच राज्यों ने चिंता जताई है। तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा की सरकारों ने केंद्र को पत्र लिखकर योजना के लिए बकाया राशि जारी करने की मांग की है। राज्यों का कहना है कि समय पर फंड नहीं मिलने से महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों का काम प्रभावित हो सकता है। इससे उन्हें बैंक से कर्ज लेने, ब्याज सब्सिडी पाने और अपना रोजगार चलाने में परेशानी हो सकती है।
दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। इस योजना के तहत देशभर में 10 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह बनाए गए, जिनसे एक करोड़ से ज्यादा महिलाएं जुड़ीं। योजना अक्टूबर 2024 में बंद हो गई। इसके बाद केंद्र सरकार ने नई व्यवस्था तैयार करने के लिए एक प्रायोगिक परियोजना शुरू की, जो दिसंबर 2025 तक चली। हालांकि, अब इस योजना को आगे बढ़ाने और इसके स्थान पर नई योजना लाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मध्य प्रदेश सरकार ने 7 सितंबर को केंद्र को पत्र लिखकर राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत 101 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की। इसमें 13.71 करोड़ रुपये बैंक ऋण पर मिलने वाली ब्याज सब्सिडी के लिए भी शामिल हैं। राज्य सरकार का कहना है कि योजना के तहत जिन लोगों ने सरकारी सहायता के भरोसे बैंक से कर्ज लिया था, उन्हें निर्धारित अवधि तक ब्याज सब्सिडी मिलनी चाहिए। योजना बंद होने का मतलब यह नहीं है कि पहले से मंजूर कर्ज पर मिलने वाली सब्सिडी की जिम्मेदारी भी खत्म हो गई। कई लाभार्थी अब भी अपने कर्ज चुका रहे हैं। ऐसे में बकाया राशि नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है।
उधर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 27 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर वर्ष 2026-27 के लिए 350 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की। राज्य में इस योजना के तहत 1.72 लाख स्वयं सहायता समूह हैं, जिनसे 18.70 लाख सदस्य जुड़े हैं। राज्य सरकार के मुताबिक, अप्रैल 2025 तक योजना के लिए उपलब्ध राशि खर्च हो चुकी थी। वहीं, महाराष्ट्र सरकार ने भी 29 सितंबर को केंद्र को पत्र लिखकर 80.99 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की। राज्य का कहना है कि फंड की कमी के कारण कर्मचारियों के वेतन, ब्याज सब्सिडी और स्वयं सहायता समूहों को मिलने वाली आर्थिक सहायता से जुड़ी देनदारियां बढ़ रही हैं।
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने केंद्र को पत्र लिखकर बताया कि पिछले दो वर्षों से मिशन के लिए कोई नई राशि नहीं मिली है। राज्य ने बकाया देनदारियों के भुगतान के लिए 6.5 करोड़ रुपये मांगे हैं। राज्य में योजना के तहत 6,796 स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं। ये समूह स्कूलों के लिए भोजन तैयार करने, कैंटीन चलाने, वर्दी सिलने और नगर निकायों से जुड़े कामों में शामिल हैं। वहीं, कर्नाटक सरकार ने केंद्र से पूछा है कि बेंगलुरु में प्रायोगिक परियोजना के लिए जारी 4.48 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए किया जा सकता है या नहीं। राज्य सरकार के अनुसार, जुलाई 2025 से कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं है।