ISRO में 10 महीने में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों के इस्तीफे, गगनयान समेत बड़े मिशनों पर पड़ सकता है असर

ISRO से पिछले 10 महीनों में 100 से अधिक वैज्ञानिकों के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने विदाई नियमों को सख्त कर दिया है। गगनयान जैसे बड़े मिशन प्रभावित होने की आशंका के बीच अब इस्तीफे या VRS पर अंतिम फैसला सीधे अंतरिक्ष विभाग करेगा।

Updated: Jul 17, 2026, 01:29 PM IST

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से पिछले 10 महीनों के दौरान 100 से अधिक वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों ने या तो इस्तीफा दे दिया है या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लिया है। उनके इस्तीफा देने या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के बाद केंद्र सरकार ने उनकी विदाई प्रक्रिया को सख्त करने का फैसला किया है। अंतरिक्ष विभाग ने 14 जुलाई को नए निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब ISRO के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के इस्तीफे या VRS पर अंतिम निर्णय सीधे अंतरिक्ष विभाग करेगा। सरकार का मानना है कि लगातार हो रही इस तरह की विदाई से गगनयान जैसे राष्ट्रीय महत्व के मिशनों की प्रगति प्रभावित हो सकती है।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस मुद्दे पर कहा कि ISRO जैसे संस्थानों में कर्मचारियों का आना-जाना सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि, विभाग ने स्वीकार किया है कि हाल के महीनों में इस्तीफों की संख्या बढ़ने से महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर असर पड़ने की आशंका बनी है। पहले ISRO के विभिन्न केंद्रों के निदेशक और प्रमुख अपने स्तर पर इस्तीफे तथा VRS मंजूर कर सकते थे लेकिन अब यह अधिकार वापस लेकर अंतिम फैसला अंतरिक्ष विभाग के पास रखा गया है।

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नौकरी छोड़ने वालों में वरिष्ठ वैज्ञानिक विक्टर जोसेफ टी का नाम भी शामिल है जो LVM3 लॉन्च व्हीकल परियोजना की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। यही हेवी-लिफ्ट रॉकेट भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने के लिए इस्तेमाल किया जाना है। इसलिए उनका जाना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, ISRO छोड़ने वाले कई वैज्ञानिक निजी अंतरिक्ष कंपनियों का रुख कर रहे हैं। साल 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने और 2023 में नई भारतीय अंतरिक्ष नीति लागू होने के बाद देश में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्तमान में भारत में 400 से अधिक पंजीकृत स्पेस स्टार्टअप सक्रिय हैं। इनमें लगभग 500 मिलियन डॉलर का निवेश हो चुका है। पिक्सेल, ध्रुवा स्पेस, स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस और बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही हैं।

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इसी बीच ISRO के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ भी चेन्नई स्थित स्पेस स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में ऑब्जर्वर के रूप में शामिल हुए हैं। उनके कार्यकाल में भारत ने चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफल लैंडिंग कराई थी और आदित्य-L1 सौर मिशन का भी सफल प्रक्षेपण किया गया था।

हाल के समय में ISRO को तकनीकी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। संगठन का भरोसेमंद माना जाने वाला PSLV रॉकेट एक वर्ष के भीतर लगातार दो मिशनों में सफल नहीं हो सका। जनवरी में EOS-N1 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और व्यावसायिक पेलोड लेकर उड़ान भरने वाला PSLV-C62 तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी आने के कारण निर्धारित मार्ग से भटक गया था। इससे पहले मई 2024 में PSLV-C61/EOS-09 (RISAT-1B) मिशन भी तीसरे चरण में चेंबर प्रेशर अचानक कम होने के कारण विफल हो गया था और रॉकेट निर्धारित सन-सिंक्रोनस कक्षा तक नहीं पहुंच सका। जिसकी वजह से रडार उपग्रह भी नष्ट हो गया।

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इन चुनौतियों के बावजूद ISRO अपने भविष्य के महत्वाकांक्षी अभियानों पर काम जारी रखे हुए है। संगठन गगनयान, चंद्रयान-4, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) और मंगलयान-2 जैसे बड़े मिशनों की तैयारी में जुटा है। गगनयान मिशन के सफल होने पर भारत अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।