नई दिल्ली। कांग्रेस ने एसआईआर के अंतर्गत बीएलओ ऐप में नई वीआईपी मतदाता श्रेणी बनाने पर घोर आपत्ति व्यक्त करते हुए सवाल किया है कि चुनाव आयोग किसके आदेश पर मतदाताओं को अलग-अलग श्रेणियों में बांट रहा है। पार्टी ने इसे संविधान के 'एक नागरिक, एक वोट, एक मूल्य' के सिद्धांत का उल्लंघन बताया।

कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग द्वारा बूथ स्तर अधिकारियों के ऐप में वीआईपी वोटरों के लिए जोड़ी गई नई श्रेणी के तहत मंत्रियों, विधायकों, जजों, आईएएस व आईपीएस अधिकारियों और अन्य मशहूर हस्तियों को विशिष्ट मतदाताओं के रूप में चिन्हित किया जा रहा है। उन्हें सुनवाई केंद्रों पर जाने की आवश्यकता नहीं है और उनकी सुनवाई उनके घर पर ही करने की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां आम नागरिक घंटों लाइनों में खड़े रहते हैं, वहीं वीआईपी मतदाताओं को विशेष सुविधा दी जा रही है। उन्होंने विशिष्ट मतदाताओं को चिन्हित करने को लेकर ईआरओ द्वारा बीएलओ को दिए गए निर्देश से संबंधित व्हाट्सऐप मैसेज भी दिखाए।

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राज्यसभा सांसद खेड़ा ने पूछा कि क्या भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को एसआईआर के तहत नोटिस मिलने और किरकिरी होने के तुरंत बाद यह वीआईपी श्रेणी बनाई गई? उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर एक विशिष्ट मतदाता को ऐसी कौन सी सुविधा मिलती है जो सामान्य मतदाता को नहीं मिलती? क्या वीआईपी मतदाताओं को गणना प्रपत्र जमा किए बिना भी मतदाता सूची में शामिल किया जा सकता है? क्या उन्हें सुनवाई केंद्रों पर उपस्थित होने से छूट है और क्या उनके दस्तावेज घर से लिए जाते हैं? क्या उनके मामलों का निपटारा पहले किया जाता है? उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग इससे संबंधित पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करे। 

खेड़ा ने कहा कि इस नए खुलासे को चुनाव आयोग द्वारा की जा रही अन्य गड़बड़ियों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के जरिए पहले देश भर में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं को वोटर लिस्ट से बाहर किया गया और अब उनका विभाजन किया जा रहा है। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आज सत्ता में ऐसे संविधान विरोधी लोग बैठ गए हैं, जिन्होंने वीआईपी और आम वोटर को अलग-अलग श्रेणियों में बांट दिया है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों के खिलाफ चुनाव आयुक्तों सुखबीर संधू और विवेक जोशी द्वारा बीते दस माह में 14 बार आपत्तियां जताने का हवाला देते हुए आगे कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी काफी समय से वोट चोरी को लेकर खुलासे कर रहे थे, आज वही सच्चाई सबके सामने आ गई है। अब जनता समझ गई है कि वोट की चोरी की जा रही है।  ज्ञानेश कुमार लगातार असंवैधानिक काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की हर संस्था को बर्बाद कर दिया है। ज्ञानेश कुमार भी चुनाव आयोग को अकेले तानाशाही से चला रहे थे, इसलिए उन्होंने बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों की बात भी नहीं सुनी। 

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खेड़ा ने एसआईआर के पीछे का असली खेल समझाते हुए कहा कि जहां भाजपा कमजोर है, वहां ज्ञानेश कुमार भाजपा को वोट नहीं देने वाले लोगों के नाम हटा रहे हैं। चुनाव आयोग ने हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल समेत एक के बाद एक राज्यों में वोट चोरी कर भाजपा की सरकारें बनवाई हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के जरिए नरेंद्र मोदी जेन-जी के नाम वोटर लिस्ट में शामिल न होने देने की साजिश भी रच रहे हैं।

राहुल गांधी की मांग को दोहराते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि ज्ञानेश कुमार तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें और सरकारी गवाह बनकर पूरी सच्चाई देश के सामने रखें। उन्होंने दो टूक कहा कि न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बचेंगे, न गृह मंत्री अमित शाह बचेंगे और न ज्ञानेश कुमार बचेंगे। खेड़ा ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी ने ज्ञानेश कुमार को मुंह दिखाने के काबिल भी नहीं छोड़ा है और इसी कारण वे खुद ही अपने कार्यक्रम रद्द करवा रहे हैं।

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